देश में रमजान (Ramadan) का चांद दिख गया है। यूपी की राजधानी लखनऊ मे चांद दिखने पर मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने ऐलान किया है कि गुरुवार सो से रमजान शुरू होगा। सऊदी अरब में मंगलवार को रमजान का चांद देखा गया था। आमतौर पर भारत और खाड़ी देशों में रमजान (Ramadan) की शुरुआत में एक दिन का अंतर रहता है। अब आज चांद दिखने के बाद देशभर में 19 फरवरी को पहला रोजा रखा जाएगा।
क्या होता है रोजा?
रोजा इस्लाम में एक अहम इबादत है। इसमें मुसलमान सूरज निकलने से पहले सहरी करते हैं। फिर सूर्यास्त तक खाने-पीने से दूर रहते हैं। सूर्यास्त के समय इफ्तार कर रोजा खोला जाता है। रोजा सिर्फ भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि मन, वाणी और व्यवहार को भी शुद्ध रखने की प्रक्रिया मानी जाती है।
रोजा और सहरी के नियम
रोजा शुरू करने से पहले सुबह सूर्योदय से पहले सहरी खाई जाती है। इसे रोजे की तैयारी माना जाता है। सहरी के बाद सूर्यास्त तक पानी या भोजन ग्रहण नहीं किया जाता। सूर्यास्त के बाद खजूर और पानी से रोजा खोलने की परंपरा है। इसके बाद नमाज अदा की जाती है।
पांच वक्त की नमाज और तरावीह
रमजान (Ramadan) में नमाज पढ़ने और रात में तरावीह की नमाज का विशेष महत्व होता है।रोजे के दौरान झूठ बोलना, गुस्सा करना, चुगली करना और गलत व्यवहार करने से बचने की सलाह दी जाती है। रोजा केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी लाभदायक माना जाता है।
– आत्मसंयम और धैर्य बढ़ता है
– गरीबों और जरूरतमंदों के प्रति सहानुभूति पैदा होती है
– मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है
