Ramzan का तीसरा अशरा-इसमें लैलतुल कद्र की रातों की बहुत है अहमियत

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हरदोई। Ramzan माह के दौरान रहमत व मगफिरत का अशरा भी हमसे दूर हो रहा हैं। इसके तीसरे अशरे में रातों की बहुत अहमियत होती है उलेमाओं की इनमें एक रात ऐसी है जो साल की तमाम रातों की सरदार अजीम रात है। जिस को लैलतुल कद्र कहते हैं।

कुरान पाक की तिलावत Ramzan शरीफ की है शान 

इस अजीम रात में की गई इबादत व तिलावत हजार रातों के बराबर है। इसी रात में कुरान नाजिल हुआ। कुरान पाक की तिलावत Ramzan शरीफ की शान है। यह अशरा जहन्नुम से आजादी तलब करने का है। अब तक इस मुबारक महीने में हमसे जो कोताही व गफलत या बेहुरमती हुई है। उसकी हब रब की बारागाह में माफी तलब करें।

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अल्लाह के रसूल हमारे आका ने फरमाया कि जब तक मेरी उम्मत Ramzan शरीफ की हुरमत को बरकरार रखेगी

अल्लाह के रसूल हमारे आका ने फरमाया कि जब तक मेरी उम्मत Ramzan शरीफ की हुरमत को बरकरार रखेगी। वह रुसवा नहीं होगी। किसी ने अर्ज किया या रसूल अल्लाह रुसवाई कैसी तो आपने फरमाया Ramzan में जिसने हराम या कोई और गुनाह कियाए शराब पी या जिना किया। ऐसे आदमी का रोजा कुबूल नहीं किया जाएगा और आइंदा साल तक उस पर अल्लाह के फरिश्तों की ओर आसमान वालों की लानत होगी और कोई नेकी कुबूल नहीं होगी।

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