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पश्चिम बंगाल विधानसभा को मिला नया अध्यक्ष, भाजपा विधायक रथींद्र बोस निर्विरोध चुने गए

Rathindra Bose

Rathindra Bose

कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा को शुक्रवार नया अध्यक्ष मिल गया। कूचबिहार दक्षिण से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) विधायक रथींद्र बोस (Rathindra Bose) को विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए निर्विरोध चुना गया। पहली बार विधायक बने रथींद्र बोस का चुनाव विधानसभा में प्रोटेम स्पीकर तापस राय की देखरेख में संपन्न हुआ।

सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रथींद्र बोस (Rathindra Bose) के नाम का प्रस्ताव रखा, जिसका समर्थन दिलीप घोष ने किया। ध्वनि मत से उन्हें विधानसभा का नया अध्यक्ष घोषित किया गया। सदन की कार्यवाही ‘वंदे मातरम्’ के साथ शुरू हुई। अध्यक्ष चुनाव के दौरान तृणमूल कांग्रेस के विधायक सदन में मौजूद नहीं थे, हालांकि बाद में वे कार्यवाही में शामिल हुए।

निर्वाचन के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय रथींद्र बोस को अध्यक्ष की कुर्सी तक लेकर गए। तृणमूल कांग्रेस ने इस चुनाव का विरोध नहीं किया। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष बिमान बंद्योपाध्याय ने भी रथींद्र बोस को शुभकामनाएं दीं।

विधानसभा की परंपरा के अनुसार अध्यक्ष बनने के बाद रथींद्र बोस (Rathindra Bose) ने सबसे पहले मुख्यमंत्री को बोलने की अनुमति दी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नए अध्यक्ष का स्वागत करते हुए कहा कि आने वाले पांच वर्षों में विधानसभा राज्य की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए रचनात्मक ढंग से कार्य करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलेगा और सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए।

इसके बाद विपक्ष के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय समेत विभिन्न दलों के विधायकों ने भी नए अध्यक्ष को बधाई दी। नौशाद सिद्दीकी और मोस्ताफिजुर रहमान राणा ने भी शुभकामनाएं दीं।

रथींद्र बोस पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं और लंबे समय तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे हैं। बाद में उन्होंने सक्रिय राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कूचबिहार दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अभिजीत डे भौमिक को 23 हजार से अधिक मतों से हराया था।

आमतौर पर विधानसभा अध्यक्ष पद के लिए कानूनविद या अधिवक्ता पृष्ठभूमि वाले नेताओं को प्राथमिकता दी जाती रही है, लेकिन भाजपा ने रथींद्र बोस को उम्मीदवार बनाकर इस परंपरा से अलग राह चुनी। निर्विरोध चुनाव के साथ अब वह पश्चिम बंगाल विधानसभा के नए अध्यक्ष बन गए हैं।

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