दशहरा: भारत में इन जगहों पर रावण का दहन नहीं बल्कि की जाती है धूम-धाम से पूजा

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नई दिल्ली। दशहरा के दिन देश भर में रावण का पुतला बनाकर उसका दहन किया जाता है। लेकिन हमारे देश में कुछ ऐसी जगहें भी हैं जहां रावण का दहन नहीं बल्कि धूम-धाम से पूजा की जाती है। इस परम्परा के पीछे बहुत सारी मान्यताएं मानी गयी हैं।

आइये जानते हैं देश में ऐसी कौनसी जगह हैं जहां रावण की पूजा की जाती है और क्यों की जाती है।

मंदसौर, मध्यप्रदेश– ऐसा कहा गया है, कि मंदसौर का असली नाम दशपुर था और यह रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका था। इस रिश्ते से मंदसौर रावण का ससुराल हुआ। इसलिए यहां दामाद के सम्मान की परंपरा के कारण रावण के पुतले का दहन करने की बजाय उसकी पूजा की जाती है।

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कनार्टक– कनार्टक स्थित कोलार जिले में भी रावण की पूजा की जाती है। यहां की धार्मिक परम्पराओं के मुताबिक, रावण भगवान शिव का भक्त था, जिस कारण यहां के लोग रावण की पूजा करते हैं। इसके अलावा कर्नाटक के मंडया जिले के मालवली नामक स्थान पर रावण के अनाम पर एक आलिशान मंदिर भी बना हुआ है, जहां लोग उसे महान शिव भक्त के रूप में पूजते हैं।

जोधपुर, राजस्थान– राजस्थान के जोधपुर में भी रावण का मंदिर बना है। यहां समाज विशेष के कुछ लोग रावण का पूजन करते हैं और खुद को रावण का वंशज मानते हैं। यही कारण है कि यहां के लोग दशहरा के अवसर पर रावण का दहन करने के बजाए रावण की पूजा करते हैं।

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काकिनाड, आंध्रप्रदेश– आंध्रप्रदेश प्रान्त के काकिनाड शहर में रावण का मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है।

बैजनाथ, हिमाचल प्रदेश– कांगड़ा जिले के इस कस्बे में भी रावण की पूजा की जाती है। ऐसा भी कहा गया है कि रावण ने यहां पर भगवान शिव की तपस्या की थी, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे मोक्ष का वरदान दिया था। यहां के लोगों की ये भी मान्यता है कि अगर उन्होंने रावण का दहन किया तो उनकी मौत भी हो सकती है। इस डर के कारण भी लोग रावण के दहन नहीं करते हैं बल्कि पूजा करते हैं।

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बिसरख, उत्तर प्रदेश– उत्तर प्रदेश के बिसरख गांव में भी रावण का मंदिर बना हुआ है और यहां पर भी आज के दिन रावण का पूजन किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि बिसरख गांव, रावण का ननिहाल था।

अमरावती, महाराष्ट्र– अमरावती के गढ़चिरौली नामक स्थान पर आदिवासी समुदाय द्वारा रावण का पूजन होता है। कहा जाता है कि यह समुदाय रावण और उसके पुत्र को अपना देवता मानते हैं।

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उज्जैन, मध्य प्रदेश– मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के चिखली गांव में भी रावण का दहन नहीं किया जाता है। क्यूंकि यहां के लोगों का मानना है कि रावण की पूजा नहीं करने पर गांव जलकर राख हो जाएगा। इसलिए इस गांव में दशहरे पर रावण का दहन करने के बजाए पूजा की जाती है। इस गांव में रावण की विशालकाय मूर्ति भी स्थापित है।

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