बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में SC का बड़ा फैसला, CBI के स्पेशल जज का कार्यकाल बढ़ा

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नई दिल्ली। बाबरी मस्जिद विध्वंस साजिश मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला लिया है। इस मामले में जांच कर रहे सीबीआई के स्पेशल जज एसके यादव का कार्यकाल सुप्रीम कोर्ट ने बढ़ा दिया है।

बता दें कि मामले की सुनवाई कर रहे स्पेशल जज एसपी यादव का कार्यकाल 30 सितंबर, 2019 को खत्म हो रहा था ,जिसके बाद कोर्ट ने अपने आदेश में स्पेशल सीबीआई जज एसके यादव के कार्यकाल को बढ़ाने का निर्देश देते हुए कहा कि जज का कार्यकाल बढ़ाया जा रहा है ताकि वह ट्रायल पूरा कर फैसला सुना सकें। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी, मरली मनोहर जोशी और अन्य के मामले में आज की तारीख से नौ महीने के अंदर फैसला दिया जाना चाहिए। कोर्ट ने 9 महीने में मामले की सुनवाई पूरी करने को कहा है।

लखनऊ की सीबीआई अदालत में बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 12 आरोपियों पर आपराधिक साजिश के तहत मुकदमा चल रहा है। जस्टिस एसके यादव को 30 सितंबर को रिटायर होना था। जज का कार्यकाल बढ़ाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा था। यूपी सरकार ने कहा है कि राज्य में किसी जज का कार्यकाल बढ़ाने का कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए कोर्ट अपने अनुच्छेद 142 के तहत अधिकार के तहत ये कर सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इसी के साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट और उत्तर प्रदेश की सरकार को इस मामले के बारे में आदेश दे दिया है और चार हफ्ते के अंदर कार्यकाल को बढ़ाने के लिए कहा है। बता दें कि 6 दिसंबर, 1992 में अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद के ढांचे को ढहा दिया गया था। इसके आरोप में बीजेपी के नेता लालकृष्ण आडवाणी समेत 13 नेताओं के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की थी।

इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की गई है, उसमें लालकृष्ण आडवाणी, उमा भारती के अलावा कल्याण सिंह (अब राजस्थान के राज्यपाल), अशोक सिंघल, मुरली मनोहर जोशी, विनय कटियार और साध्वी ऋतंभरा जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

इस घटना से जुड़े केस नंबर 198 में पुलिस अधिकारी गंगा तिवारी ने 8 लोगों के खिलाफ राम कथा कुंज सभा मंच से मुस्लिम समुदाय के खिलाफ धार्मिक उन्माद भड़काने वाला भाषण देकर बाबरी मस्जिद का ढांचा गिरवाने का मुकदमा कराया था। उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 153बी, 505, 147 और 149 के तहत मुकदमे दायर थे।

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