बीजेपी सांसद की खातिरदारी में जुटे थे डॉक्टर, दवा न मिलने पर मरीज ने तोड़ा दम

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सिद्धार्थनगर। यूपी में एक बार फिर सरकारी अस्पताल में लापरवाही से एक मरीज की जान जाने का मामला सामने आया है। इस बार मामला बेहद चौकाने वाला है क्योंकि ये मौत ऐसे वक्त पर हुई जब बीजेपी सांसद जगदम्बिका पाल अस्पताल निरीक्षण करने पहुंचे हुए थे। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टर बीजेपी सांसद की अगवानी में इतने व्यस्त हो गए कि ये भूल गए कि अस्पताल के मरीजों की जिम्मेदारी भी उन पर है। वहीं महिला की मृत्यु के बाद अब सांसद जांच करवाने की बात कह रहे हैं।

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बीजेपी सांसद जगदम्बिका पाल कर रहे थे अस्पताल का निरीक्षण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीजेपी सांसद जगदम्बिका पाल सिद्धार्थनगर के जिला अस्पताल में निरीक्षण के लिए पहुंचे हुए थे। इस दौरान एक महिला मरीज ने दम तोड़ दिया महिला का नाम सावित्री (23 वर्ष) बताया जा रहा है। जोकि इन्द्रा नगर निवासी सुरेश मौर्या की पत्नी है। सावित्री को शुक्रवार रात को अस्पताल में उल्टी—दस्त की शिकायत होने पर भर्ती करवाया गया था। पीड़िता के पति सुरेश मौर्या ने बताया कि महज डेढ़ साल पहले ही उनकी शादी हुई​ थी।

सुरेश का आरोप है कि शुक्रवार रात को उसे उल्टी—दस्त की शिकायत के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया। रात में ड्यूटी डॉक्टरों ने भी इलाज नहीं किया। उनका कहना है कि शनिवार सुबह से पूरा अस्पताल स्टाफ सांसद की अगवानी में जुटा हुआ था। किसी ने भी सावित्री की तरफ ध्यान नहीं दिया। उसे समय से दवाई न मिलने और डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी मौत हो गई।

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परिजनों के हंगामें पर अस्पताल प्रशासन ने बुलवाई पुलिस

पीड़िता की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। जिस पर अस्पताल प्रशासन ने तत्काल पुलिस बुलवा ली। जब वहां मौजूद बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल को हंगामे की भनक लगी तो उन्होंने खुद पीड़ित के पास जाकर पूरी शिकायत सुनी। जिसके बाद सांसद ने इस पूरे वाकये पर जिलाधिकारी को तत्काल जानकारी दी। जिलाधिकारी के निर्देश पर दोपहर एक बजे अपर जिलाधिकारी न्यायिक गुरुप्रसाद गुप्ता ने पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए हैं। साथ ही सांसद ने इस मामले में जांच करवाने की बात कही है।

अस्पताल प्रशासन की सफाई

वहीं इस मामले में अस्पताल प्रशासन के अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा है कि महिला के शरीर में उल्टी—दस्त के कारण पानी की कमी हो गई थी। उसे सभी जरूरी उपचार दिए गए थे। उन्होंने कहा कि लापरवाही के आरोप बेबुनियाद हैं। वहीं पीड़ित पक्ष का कहना है कि मृतका सावित्री की उम्र महज 23 साल थी। उसे पहले किसी भी तरह की बीमारी नहीं रही है। उसे सिर्फ उल्टी—दस्त की शिकायत हुई थी, अगर डॉक्टर लापरवाही न करते तो शायद वह जिंदा होती। फिलहाल इस पूरे प्रकरण की जांच सिद्धार्थ नगर के जिलाधिकारी के निर्देश पर करवाई जा रही है।

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