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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: राम जन्मभूमि परिसर में SIT की दोबारा एंट्री, बैंक कर्मचारियों से पूछताछ

SIT re-enters Ram Temple offering theft case

SIT re-enters Ram Temple offering theft case

अयोध्या: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम जन्मभूमि परिसर में हुए कथित चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितता मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) और स्थानीय पुलिस की जांच दूसरे दिन और अधिक तेज हो गई है। शुक्रवार सुबह एसआईटी की टीम स्थानीय गेस्ट हाउस से सीधे राम जन्मभूमि परिसर के लिए रवाना हुई, जहां कड़े सुरक्षा पहरे के बीच अधिकारियों और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ का दौर आज भी लगातार जारी है। मामले से जुड़े वित्तीय तथ्यों और बारीकियों को खंगालने के लिए एसआईटी ने आज बैंक कर्मचारियों को भी तलब किया है, जिनसे एक बंद कमरे में सघन पूछताछ की जा रही है।

जांच अधिकारी इस समय राम मंदिर ट्रस्ट के खातों में हुए वित्तीय लेनदेन (Financial Transactions), दान के तौर पर आई डिजिटल और नकद राशि तथा बैंक के अन्य आधिकारिक दस्तावेजों से संबंधित पहलुओं की गहनता से पड़ताल कर रहे हैं। वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बैंक कर्मियों से मिलने वाले इनपुट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही इस मामले में आगे की बड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

ट्रस्ट के पदाधिकारियों से 4 घंटे पूछताछ

इससे पहले, बृहस्पतिवार को अयोध्या पहुंची एसआईटी की टीम ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों—चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव से करीब चार घंटे तक बेहद तीखे सवाल-जवाब किए थे। इस दौरान टीम ने चढ़ावे के ऑडिट और वित्तीय खातों से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए। सूत्रों के मुताबिक, कल हुई पूछताछ के दौरान ट्रस्ट के पदाधिकारियों की ओर से कई महत्वपूर्ण सवालों के संतोषजनक और स्पष्ट जवाब नहीं मिले हैं, जिसके कारण आने वाले दिनों में पूछताछ का दायरा और अधिक बढ़ने की पूरी संभावना है। दूसरी ओर, स्थानीय पुलिस की आपराधिक जांच भी समानांतर रूप से चल रही है, जिससे संबंधित संदिग्धों पर अब पुलिस और एसआईटी का दोहरा शिकंजा कस गया है।

अब होगा ट्रस्ट के 5 साल के ऑडिट का ‘री-ऑडिट’

गौरतलब है कि 6 जून को राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का यह संवेदनशील मामला पहली बार उजागर हुआ था, जिसके बाद शासन के निर्देश पर 13 जून को एसआईटी का गठन किया गया। एसआईटी ने शुरुआती तफ्तीश के बाद 23 जून को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट गृह विभाग को सौंप दी थी। अब जांच के दूसरे और अधिक विस्तृत चरण में, एसआईटी वित्तीय गड़बड़ियों के पूरे खेल का पर्दाफाश करने के लिए ट्रस्ट के पिछले 5 वर्षों के ऑडिट का ‘री-ऑडिट’ (पुनः परीक्षण) कर रही है। एसआईटी ने ट्रस्ट प्रबंधन से अब तक हुए सभी ऑडिट का पूरा लेखा-जोखा मांगा है, हालांकि कुछ अहम ब्योरा अब भी जांच टीम को नहीं सौंपा गया है। अधिकारियों का मानना है कि पूरा वित्तीय डेटा मिलने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि दान की राशि में कहां, कितनी और किस स्तर पर गड़बड़ी की गई।

आरोपी के घर पहुंची पुलिस

इस बीच, मामले के विवेचक और क्षेत्राधिकारी (CO) अयोध्या आशुतोष तिवारी ने भी अपनी टीम के साथ बृहस्पतिवार को राम मंदिर परिसर का दौरा किया। उन्होंने वहां स्थापित दान पात्रों (ड्रॉप बॉक्स) का भौतिक निरीक्षण किया और दान पात्र से राशि निकालने से लेकर उसकी पूरी गणना (Counting) करने की प्रशासनिक प्रक्रिया को बारिकी से समझा। पुलिस टीम ने मंदिर परिसर के सुरक्षा कंट्रोल रूम से घटना के दिनों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज भी अपने कब्जे में ले लिए हैं।

वहीं, पुलिस की एक अन्य विशेष टीम ने बृहस्पतिवार शाम को इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला के प्रतापगढ़ स्थित पैतृक गांव में दबिश दी। पुलिस ने आरोपी के परिजनों से करीब आधे घंटे तक कड़ी पूछताछ की और घर से कुछ संदिग्ध दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

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