जाने सीतापुर में ‘आदमखोर कुत्तों’ का सच, देखें रोंगटे खड़े कर देने वाला Video

आदमखोर कुत्तों
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सीतापुर। समाज में वफादारी की कसौटी पर इंसानों से ज्यादा कुत्तों की मिसाल दी जाती है, लेकिन सीतापुर जनपद में आते ही कुत्तों के बारे में राय बदल जाती है। सीतापुर में कुत्तों से वफादारी की तमगा का छीन लिया गया है,क्योंकि सीतापुर के कुत्ते अब आदमखोर हो गए हैं। आदमखोर कुत्तों के नाम पर यहां आतंक फैला हुआ है।  बीते छह महीनों में करीब एक दर्जन  बच्चों की मौत कुत्तों के हमले में हो चुकी है। दर्जनों लोग घायल हैं और गांवों में लोग घरों से बाहर निकलने में घबरा रहे हैं।  क़रीब डेढ़ हफ़्ते पहले 11 साल के ख़ालिद अली तड़के सुबह स्कूल के लिए निकले थे और रास्ते के इसी बाग में आम चुन रहे थे। उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि पांच आवारा कुत्तों का एक झुंड घात लगाए बैठा है।

आदमखोर कुत्तों के हमले का 28वां मामला सामने आया

यूपी के सीतापुर जिले में अब कुत्तों के हमले का 28वां मामला सामने आया है।  आदमखोर कुत्तों ने एक 9 वर्षीय मासूम बच्चे पर हमला कर दिया।  जिसे उपचार के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  वहीं शनिवार देर शाम कुत्तों के झुंड ने एक महिला पर जानलेवा हमला कर दिया।  जिससे गंभीर हालत में सीएचसी में भर्ती कराया गया है।  घटना खैराबाद के बन्नी सरायपुर गांव की है।  बता दें कि सोनम की मौत के बाद जिले के खैराबाद थाना क्षेत्र में कुत्तों के हमलों में अब तक कुल 14 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।

आदमखोर कुत्तों के आतंक के लिए स्थानीय लोग बंद हो चुके अवैध बूचड़खाने को ठहरा रहे हैं ज़िम्मेदार

करीब एक दर्जन बच्चे गंभीर रूप से घायल भी हुए। फिलहाल इलाके के सभी लोग  आदमखोर कुत्तों के आतंक से  बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर दिया है। इस बात का पता किसी को नहीं चल रहा है कि एकाएक इलाके के कुत्ते बच्चों पर हमला क्यों करने लगे हैं। ज़्यादातर स्थानीय लोग इलाके के एक बंद हो चुके अवैध बूचड़खाने को ज़िम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनके मुताबिक़ आवारा कुत्तों को यहां से भोजन मिलता था और इसके बंद होने के बाद कुत्ते हिंसक हो चुके हैं। हालांकि इस दलील में दम इसलिए नहीं दिखता क्योंकि सरकार ने इसे साल भर पहले ही बंद करा दिया था जबकि बच्चों पर हमले छह महीने पहले शुरू हुए हैं।

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इलाके में अफ़वाहों का बाज़ार भी है गर्म

इसमें एक ये भी है कि जंगलों से आदमखोर कुत्तों की नस्ल निकली है और हमला कर रही है। साबिर अली का भतीजा एक ऐसे ही हमले का शिकार हुआ था।  उन्हें लगता है जिन कुत्तों ने हमला किया था वो सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों से थोड़े अलग थे और उनके जबड़े सियार की तरह थे।

हमला कुत्ते नहीं बल्कि भेड़िये कर रहे हैं, नहीं होगी हैरानी

वर्ल्ड वाइल्डलाइफ़ फंड और भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान की टीमें इलाके के दौरे कर रही हैं जिससे हमला करने वालों की ‘असल पहचान’ हो सके। एनिमल वेलफ़ेयर बोर्ड ऑफ़ इंडिया के चीफ़ ट्रेनर विवेक शर्मा भी ज़िले में चश्मदीदों से मिलकर शिनाख्त करने में जुटे हैं। उन्होंने बताया कि मुझे हैरानी नहीं होगी अगर ये पता चले कि हमला कुत्ते नहीं बल्कि भेड़िये कर रहे हैं।  अगर भेड़ियों में रेबीज़ की बीमारी हो जाती है तो वे एक से 20 किलोमीटर तक के दायरे में घूमकर शिकार करने लगते हैं।  उनका निशाना बच्चे ही होते हैं।

कुत्तों का सियार या भेड़ियों के साथ प्रजनन से शिकारी हाउंड जैसे कुत्तों की नस्ल वाले लक्षण आ गए हों

पिछले तीन दशकों में उत्तर प्रदेश और पड़ोसी बिहार में इस तरह के कुछ मामले दर्ज किए गए थे जिनमें जंगली भेड़ियों ने जान-माल को नुकसान पहुंचाया था। लखनऊ के जाने-माने डॉग-ब्रीडर असग़र जमाल का मानना है कि कुत्तों का सियार या भेड़ियों के साथ प्रजनन होना भी एक वजह हो सकती है। उनके मुताबिक़ कि शायद इस वजह से कुछ ऐसे कुत्ते पैदा हो गए हों जिनमें शिकारी हाउंड जैसे कुत्तों की नस्ल वाले लक्षण आ गए हों।

एसपी आनंद कुलकर्णी ने बताया कि 50 कुत्ते  पकड़ लिए हैं और विशेषज्ञ उनके व्यवहार की कर रहे हैं जांच

स्थानीय प्रशासन इस तरह के तर्क या कयासों से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखता और मामले की तह तक पहुँचने का दावा कर रहा है। सीतापुर ज़िले के एसपी  आनंद कुलकर्णी ने बताया लगभग सभी चश्मदीद कुत्तों के हमले की बात दोहराया । उन्होंने कहा कि 50 कुत्ते  पकड़ भी लिए हैं।  विशेषज्ञ उनके व्यवहार की जांच कर रहे हैं।

गश्ती दल बना दिन-रात कुत्तों को मारने-पकड़ने के लिए घूम रहे हैं लोग

जिन कुत्तों को अभी तक मारा गया है या जिन्हें पकड़ा गया है वो तो उत्तर भारत में पाए जाने वाले आवारा कुत्तों की तरह ही हैं। लेकिन जवाबी हमलों का एक ख़तरनाक सिलसिला भी शुरू हो चुका है। हाथों में लाठियां और बंदूकें लिए करीब पांच गाँव के लोग गश्ती दल बनाकर दिन-रात कुत्तों को मारने-पकड़ने के लिए घूम रहे हैं। गुरपलिया गाँव के रहने वाले वसी खान भी ऐसे ही एक दल का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि ये जंगली कुत्ते होते हैं और इन्हें पैदल भाग कर पकड़ना आसान नहीं।  लेकिन पिछले एक हफ़्ते में ही हमने छह कुत्ते मारे हैं।  हम लोग झुंड में चलते हैं और इनकी तलाश में जंगलों के भीतर जाते हैं।

प्रशासन ने भी कुत्तों को पकड़ने की मुहिम कर दी तेज़

तीन टीमें कुत्तों की तलाश कर रही हैं और इनको ड्रोन कैमरों के अलावा वायरलेस सेट्स और नाइट विज़न उपकरण भी दिए गए हैं। लेकिन जिन लोगों ने अपनों को खो दिया है उनकी ज़िन्दगी पटरी पर कब लौटेगी, इसका पता किसी को नहीं। एक मृतक बच्चे की माँ ने कहा कि अगर मुझे इन हमलों का पता होता तो अपने नौ साल के बेटे को घर के भीतर ताले में बंद रखती।

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