नवरात्रि: मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप ‘स्कंदमाता’ को लगायें इस चीज़ का भोग

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मां स्कंदमाता

लखनऊ। नवरात्रि के पवन महीने की शुरुआत हो चुकी है और आज माता का चौथा दिन है जोकि मां स्कंदमाता का होता है। इस दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप मां स्कंदमाता की उपासना की जाएगी। माता का ये नाम उनके पुत्र स्कंद कुमार कार्तिकेय के कारण पड़ा। 

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स्कंदमाता का स्वरूप

स्कंदमाता की चार भुजाएं हैं जिनमें से मां के दो हाथों में कमल का फूल तथा एक भुजा भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए ऊपर की ओर उठी हुई है, वहीं एक हाथ से गोद में बैठे पुत्र स्कंद को पकड़ा हुआ है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसीलिए इन्हें पद्मासना भी कहा जाता है। सिंह इनका वाहन है। 

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मां के पास है हर समस्या का निवारण

शास्त्रों में स्कंदमाता की आराधना को काफी महत्व दिया गया है। ऐसा भी कहा गया है कि इनकी उपासना करने से भक्तों की सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं तथा भक्त को मोक्ष की प्राप्ति होती है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण इनका उपासक अलौकिक तेज और कांतिमय हो जाता है। अतः मन को एकाग्र रखकर और पवित्र रखकर इस देवी की आराधना करने वाले साधक या भक्त को भवसागर पार करने में कठिनाई नहीं आती है। 

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स्‍नेह की देवी हैं स्कंदमाता

माता को अपने पुत्र स्कंद से अत्यधिक प्रेम है और कार्तिकेय को देवताओं का सेनापति माना जाता है। जब धरती पर राक्षसों का अत्याचार बढ़ता है तो माता अपने भक्तों की रक्षा करने के लिए शेर पर सवार होकर दुष्टों का विनाश करती हैं। उनको उनका नाम पुत्र स्कन्द के साथ जोड़ना बहुत अच्छा लगता है। इसलिए इन्हें स्नेह और ममता की देवी माना जाता है।

लगायें इन चीजों का भोग

पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद किसी ब्राह्मण को दे देना चाहिए। ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है साथ ही सारे संकट भी दूर हो जाते हैं।

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मां का मंत्र

मां स्कंदमाता का वाहन सिंह है। इस मंत्र के उच्चारण के साथ मां की आराधना की जाती है।

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

इसके अतिरिक्त इस मंत्र से भी मां की आराधना की जाती है:
या देवी सर्वभू‍तेषु मां स्कंदमाता रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

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