सीटों के बंटवारा को लेकर खुली परतें, विधानसभा चुनाव तक जारी रहेगा सपा-बसपा गठबंधन

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लखनऊ। लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन को लेकर शर्तों व नियमों सारी परतें धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। मायावती इस मामले में पीछे हटने की मूड में नहीं दिखाई पड़ रही हैं। सूत्रों की माने तो यह गठबंधन सिर्फ 2019 ही नहीं बल्कि उसके बाद भी जारी रहने वाला है। फिलहाल अभी सीटों के बंटवारे को लेकर निर्वाचन क्षेत्रों का फैसला किया जाएगा।

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सपा-बसपा गठबंधन में इतनी-इतनी सीटों पर होगा बंटवारा

सूत्रों के मुताबिक सपा-बसपा गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत जारी है बताया जा रहा है कि मायावती की पार्टी लोकसभा की 45 और सपा 35 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। अखिलेश पहले भी कई बार कह चुके हैं कि अगर उन्हें दो कदम पीछे हटना पड़ा तो भी वह तैयार हैं साथ ही उन्होंने अपना मकसद सिर्फ बीजेपी को हराना बताया था इसके अलावा दोनों पार्टियों के बीच गठबंधन केवल मई, 2019 के संसदीय चुनावों तक ही सीमित है, यह 2022 में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए नहीं है।

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कैराना चुनाव में मायावती के कहने पर आरएलडी को मिला टिकट

सपा के सूत्रों के मुताबिक अखिलेश ने मायावती से अनुरोध किया है कि संचार व्यवस्था खुली रहनी चाहिए लेकिन बसपा सुप्रीमो ने बेरुखी दिखाते हुए न कह दिया। मायावती सीधे तौर पर बात नहीं करना चाहती हैं और वह वार्ताकारों के जरिए ही बात कर रही हैं। बताया जा रहा है कि जब कैराना लोकसभा सीट के लिए संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार खड़ा करने के प्रस्ताव पर मायावती ने मुलाकात करने से इंकार कर दिया। वह आरएलडी नेता जयंत चौधरी इस सीट पर चुनाव लड़ना चाहती हैं।

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पार्टी के सूत्रों की माने तो अखिलेश ने उन्हें मामले को सुलझाने के लिए लखनऊ में आमंत्रित किया। मायावती ने उनसे मुलाकात करने की बजाय एक संदेश भेजा कि यह टिकट एक महिला मुस्लिम नेता को दी जाए जो रालोद के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ सकती है। कैराना निर्वाचन क्षेत्र में जाटों का दबदबा है और वे मुसलमानों को वोट नहीं देते। इसलिए यह जाटों में रालोद की लोकप्रियता की परीक्षा होगी। उन्हें यह संदेश वार्ताकारों के जरिए भेजा गया।

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