15 अगस्त: PM कि सुरक्षा में तैनात होंगी ये स्पेशल महिला स्वाट टीम

स्वाट टीम
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नई दिल्ली। दिल्ली में इस बार लाल किला पर आयोजित होने वाले स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान आतंकी हमले का खतरा कहीं ज्यादा है। खुफिया एजेंसियों ने दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान फिदायीन हमले की पुख्ता जानकारी दी है। ऐसे में लाल किले में आयोजित होने वाले कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सुरक्षा की कमान देश की पहली विशेष महिला स्वाट टीम को दी गई है।

महिला स्वाट टीम के गठन और प्रशिक्षण के बाद ये होगी पहली तैनाती 

शुक्रवार को गृहमंत्री राजनाथ सिंह देश की पहली महिला स्वाट टीम को दिल्ली में तैनात करेंगे। बता दें कि महिला स्वाट टीम के गठन और प्रशिक्षण के बाद ये इनकी पहली तैनाती होगी। इन महिला कमांडो को 15 महीने के लिए देशी-विदेशी विशेषज्ञों द्वारा कड़ा प्रशिक्षण दिया गया है। वहीँ ये पहला ऐसा मौका है जब खुले आसमान के नीचे और लाखों की भीड़ की मौजूदगी में होने वाले स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री की सुरक्षा के लिए महिला स्वाट टीम को तैनात किया जा रहा है। इस दौरान ये महिला कमांडो कई तरह के अत्याधुनिक हथियारों से लैस होंगी।

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 2008 के मुंबई हमले के बाद महसूस हुई इसकी जरुरत 

आपको बता दें कि स्वाट कमांडो ट्रेनिंग बेहद कठिन होती है। यह फोर्स किसी भी स्थिति में दुश्मन का खात्मा करने की ताकत रखती है। इन्हें हवा, पानी और जंगल में ऑपरेशन को अंजाम देने में महारथ हासिल होती है। अंधेरे में भी इन्हें दुश्मन की पहचान कर उसे खत्म करने की ट्रेनिंग दी जाती है। आतंकी और नक्सली ऑपरेशन का काम इस टीम को दिया जाता है। 2008 में हुए मुंबई हमले के बाद भारत में स्वैट टीम बनाने की जरूरत महसूस हुई थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस को यह काम सौंपा गया था।

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दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर ने दिया था आइडिया 

भले ही भारत में महिला स्वाट टीम का ये पहला दस्ता हो, लेकिन दुनिया के कई देशों में महिला स्वाट टीम काफी समय से कार्यरत हैं। इन्हें दुर्गम जगहों और खतरनाक मिशन में शामिल किया जाता है। विदेशों में महिला स्वाट टीम को पुरुष स्वाट टीम की तरह उनके साथ ही संयुक्त ऑपरेशन में तैनात किया जाता है। इन्हें तेज रफ्तार वाहनों के साथ खतरनाक हथियारों और उपकरणों से भी लैस किया जाता है। दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने भारत में पहली महिला स्वाट टीम बनाने का आइडिया दिया था। उन्होंने आतंकी हमलों और बंधक को छुड़ाने के लिए विशेष तौर पर महिला स्वाट टीम की आवश्यकता पर जोर दिया था। वर्ष 2008 में मुंबई में हुए आतंकी हमलों के बाद देश में स्वाट टीम के गठन की जरूरत महसूस करी गई।

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12 महीनों की सख्त कमांडों ट्रेनिंग और 3 महीने की विशेषज्ञ स्वाट कि ट्रेनिंग

देश की पहली महिला स्वाट टीम को देशी-विदेशी प्रशिक्षकों द्वारा 12 महीनों की सख्त कमांडों ट्रेनिंग और फिर 3 महीने की विशेषज्ञ स्वाट ट्रेनिंग दी गई है। इस बेच  इनको 24 घंटे या उससे भी ज्यादा देर तक चलने वाले ऑपरेशन की ट्रेनिंग दी गई है। मालूम हो कि पुरुष कमांडो को केवल 12 महीने की ही ट्रेनिंग दी जाती है। इन्हें 3 महीने की विशेषज्ञ स्वाट ट्रेनिंग अलग से दी गई है। महिला स्वाट टीम को 12 महीने की कमांडो ट्रेनिंग झारौदा कलां और स्वैट ट्रेनिंग एनएसजी के मानेसर स्थित सेंटर पर दी गई है।

टीम कि 36 महिला सदस्य और सभी पूर्वोत्तर के राज्यों की

बता दें कि पहली महिला स्वाट टीम में 36 महिला सदस्य हैं और ये सभी पूर्वोत्तर के राज्यों की है। इनमें से सबसे ज्यादा 13 महिला कमांडो असम कि है, 5 अरुणाचल प्रदेश कि, 5 मणिपुर कि, 5 सिक्किम कि, 4 मेघालय कि, 2 नागालैंड कि, 1 मिजोरम और 1 त्रिपुरा की हैं। इस स्वाट टीम में एक टीम लीडर, दो रेकी अधिकारी, एक संचार विशेषज्ञ और दो शार्प शूटर शामिल हैं। इसके अलावा टीम में पूर्वोत्तर के इंस्ट्रक्टर को भी तैनात किया गया है, ताकि ऑपरेशन और प्रशिक्षण के दौरान भाषा की कोई दिक्कत न आए।

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चार तरह के हथियार और 10 उपकरण से लैस है हर महिला कमांडो

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इन महिला कमांडो को विशेष तौर पर एमपी-5 सबमशीन गन, एके-47 रायफल, जीलॉक-17 और जीलॉक-26 पिस्टल को चलाने का प्रशिक्षण देकर इन हथियारों से इन्हें लैस किया गया है। इसके अलावा इन्हें हैंड ग्रेनेड किट, वायरलेस सेट, 20 मीटर नाइलॉन रस्सी, पेंसिल टॉर्च, बुलेटप्रूफ जैकेट, बुलेटप्रूफ हेल्मेट, कटर, कमांडो डैगर, स्पेशल नी और ऐल्बो पैड से भी लैस किया गया है।

दिल्ली में फिदायीन आतंकी हमला होने की पुख्ता जानकारी 

बताया यह जा रहा है कि इस टीम को सेंट्रल और साउथ दिल्ली की रणनीतिक लोकेशन पर तैनात किया जाएगा। दरअसल खुफिया एजेंसियों ने इस बर स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दिल्ली में फिदायीन आतंकी हमला होने की पुख्ता जानकारी दी है। इस फिदायीन हमले में महिला आतंकवादियों का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ये टीम ऐसे किसी भी हमले को न केवल पहचानने के लिए बल्कि उससे निपटने के लिए भी माहिर है। स्वाट टीम की ज्यादातर महिला कमांडो को एंटी टैरर वैन पराक्रम में तैनात किया जाएगा।

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