24 घण्टे ऑनलाइन

यूपी के गांव हो रहे हाईटेक, प्लास्टिक कचरे से बनाई 75 किलोमीटर लंबी सड़क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांव अब स्वच्छता और नवाचार की नई पहचान गढ़ रहे हैं। प्लास्टिक कचरे (Plastic Waste) से सड़क निर्माण, घर-घर कूड़ा संग्रहण कर उससे खाद निर्माण और आय सृजन के अभिनव प्रयोगों ने प्रदेश के ग्रामीण…

24GhanteOnline
February 5, 2026
2 min read
यूपी के गांव हो रहे हाईटेक, प्लास्टिक कचरे से बनाई 75 किलोमीटर लंबी सड़क

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के गांव अब स्वच्छता और नवाचार की नई पहचान गढ़ रहे हैं। प्लास्टिक कचरे (Plastic Waste) से सड़क निर्माण, घर-घर कूड़ा संग्रहण कर उससे खाद निर्माण और आय सृजन के अभिनव प्रयोगों ने प्रदेश के ग्रामीण परिदृश्य को हाईटेक बना दिया है। राजधानी लखनऊ समेत रामपुर, अमेठी, ललितपुर और एटा में प्लास्टिक कचरे (Plastic Waste) से अब तक 75 किलोमीटर लंबी सड़कें तैयार की जा चुकी हैं, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ विकास का नया मॉडल पेश कर रही हैं। 

’वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल पर काम-

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश में वेस्ट मैनेजमेंट का मास्टर प्लान तैयार किया गया है। इसके तहत ग्राम पंचायतों में घर-घर से कूड़ा संग्रहण शुरू कर वर्मी खाद का उत्पादन किया जा रहा है। इस पहल से अब तक 3 करोड़ रुपये से अधिक की आय सृजित हो चुकी है। वहीं प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन इकाइयों से 29 लाख रुपये की अतिरिक्त कमाई की गई है। इस योजना के तहत पंचायतीराज विभाग प्रदेश में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ मॉडल पर काम कर रहा है।

प्रदेश के हर गांव में किया जाएगा अभिनव प्रयोग-

पंचायती राज विभाग द्वारा चलाए जा रहे स्वच्छ गांव महाभियान के तहत कूड़े को संसाधन में बदला जा रहा है। प्लास्टिक कचरे का सदुपयोग कर सड़क निर्माण, जैविक कचरे से खाद उत्पादन और पंचायतों की आय बढ़ाने के ये प्रयोग प्रदेश के हर गांव को स्वच्छ, आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहे हैं। इस योजना के जरिए प्रदेश के हर गांव में अभिनव प्रयोग किए जाएंगे।

प्लास्टिक वेस्ट (Plastic Waste) का यूटिलाइजेशन-

पंचायती राज विभाग के निदेशक अमित कुमार सिंह के अनुसार, विभाग ग्राम पंचायतों को नवाचार के माध्यम से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। गांव-गांव स्वच्छता अभियान के साथ प्लास्टिक वेस्ट (Plastic Waste) के यूटिलाइजेशन से न केवल पर्यावरण सुरक्षित हो रहा है, बल्कि करोड़ों रुपये की आय भी सृजित हो रही है।

इस खबर को लाइक और शेयर करें

Comments (0)

0/2000 characters

Facebook टिप्पणियाँ

टिप्पणी करने के लिए Facebook में लॉगिन करें

टिप्पणियां अक्षम हैं। व्यवस्थापक से संपर्क करें।

सम्बंधित ख़बरें