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धनतेरस पर खरीदारी के बाद न करें ये गलती, जानें बर्तन, सोना-चांदी और झाड़ू की पूजा का तरीका

November 6, 2026
3 min read
धनतेरस पर खरीदारी के बाद न करें ये गलती, जानें बर्तन, सोना-चांदी और झाड़ू की पूजा का तरीका

धनतेरस का त्योहार दिवाली के आगमन का संकेत देता है। हिंदू धर्म में इस दिन खरीदारी और पूजा-पाठ का खास महत्व है। मान्यता है कि धनतेरस पर सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू और साबुत धनिया खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है। यही वजह है कि बाजारों में इस दिन खरीदारी को लेकर खास उत्साह रहता है।

धनतेरस पर माता लक्ष्मी के साथ भगवान कुबेर और भगवान धन्वंतरि की पूजा की जाती है। धार्मिक विश्वास है कि इनकी आराधना से परिवार में धन-धान्य और खुशहाली बनी रहती है। हालांकि, इस दिन खरीदी गई वस्तुओं को घर लाने के बाद उनके पूजन से जुड़ी कुछ परंपराएं भी प्रचलित हैं।

बर्तन खरीदें तो इस बात का रखें ध्यान

धनतेरस पर नए बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि नए बर्तन को घर में खाली नहीं रखना चाहिए। उसमें पानी, चावल, चीनी या मिठाई भरकर घर में प्रवेश कराना चाहिए। इसके बाद बर्तन को पूजा स्थल पर रखकर भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी को याद करें। रोली और अक्षत से तिलक करके पूजा करें।

सोना-चांदी लाने के बाद करें ये काम

इस दिन सोने-चांदी के सिक्के या आभूषण खरीदने वाले लोग घर पहुंचकर सबसे पहले उन्हें गंगाजल से शुद्ध कर सकते हैं। इसके बाद माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर के सामने रखकर पूजा करें। धार्मिक परंपरा के अनुसार, पूजा के बाद इन्हें लाल या पीले कपड़े में बांधकर तिजोरी या सुरक्षित स्थान पर रखा जाता है।

झाड़ू की पूजा से जुड़ी है खास मान्यता

धनतेरस पर झाड़ू खरीदने की भी परंपरा है। इसे माता लक्ष्मी का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है। नई झाड़ू को घर लाने के बाद उस पर गंगाजल छिड़कें और मौली बांधें। फिर कुमकुम और अक्षत लगाकर पूजा करें। इसके बाद झाड़ू को साफ-सुथरी और सुरक्षित जगह पर रखें। मान्यता के अनुसार, नई झाड़ू से घर की सफाई शुरू करना भी शुभ होता है।

साबुत धनिए की पोटली तिजोरी में रखें

धनतेरस पर साबुत धनिया खरीदना भी कई घरों में शुभ परंपरा का हिस्सा है। घर लाने के बाद इसे माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की पूजा में अर्पित करें। फिर थोड़े से साबुत धनिए को लाल या पीले कपड़े में बांधकर पोटली बना लें और तिजोरी या अलमारी में रख दें।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बचे हुए धनिए के कुछ बीज दीपावली की पूजा के बाद गमले, आंगन या बगीचे में बोए जा सकते हैं। इसका कुछ हिस्सा धनिया पंजीरी जैसे प्रसाद बनाने या भोजन में इस्तेमाल किया जा सकता है।

धनतेरस पर खरीदारी के साथ इन छोटी-छोटी परंपराओं का भी महत्व माना जाता है। इनका पालन लोग अपनी पारिवारिक मान्यताओं और श्रद्धा के अनुसार करते हैं।

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