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देश की सभी विधानसभाएं डिजिटल और पेपरलेस हो चुकी हैं : ओम बिरला

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक विधानसभा परिसर में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। 'सशक्त विधायिका-समृद्ध राष्ट्र' संदेश के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर…

24GhanteOnline
January 19, 2026
5 min read
देश की सभी विधानसभाएं डिजिटल और पेपरलेस हो चुकी हैं : ओम बिरला

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ऐतिहासिक विधानसभा परिसर में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का भव्य एवं गरिमामय शुभारंभ हुआ। 'सशक्त विधायिका-समृद्ध राष्ट्र' संदेश के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर की विधायिकाओं के पीठासीन अधिकारी एक मंच पर एकत्रित हुए हैं।

सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने लोकतंत्र को सशक्त बनाने में विधायिकाओं की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आज वर्ष 2026 में देश की सभी विधानसभाएं पेपरलेस हो चुकी हैं और उनकी कार्यवाही का सजीव प्रसारण हो रहा है, जिससे जनता को सीधे जानकारी मिल रही है। विधायिकाओं की सबसे बड़ी जिम्मेदारी जनता का विश्वास तथा विश्वसनीयता बनाए रखना है। भले ही सभी सदस्य अलग-अलग राजनीतिक दलों और विचारधाराओं से आते हों, लेकिन जनता की अपेक्षा यही होती है कि उनके मुद्दे सदन में मजबूती से उठें और शासन तक पहुंचें। सहमति व असहमति, लोकतंत्र की ताकत है और भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र होने पर गर्व कर सकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की छवि बदली


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि यह अत्यंत गौरव की बात है कि इतने बड़े राष्ट्रीय सम्मेलन की मेजबानी का अवसर प्रदेश को मिला है। उन्होंने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिनंदन करते हुए कहा कि उनके संरक्षण में यह आयोजन और अधिक गरिमामय हुआ है। उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, सेवा, समर्पण और सौंदर्य की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते पौने 9 वर्षों में प्रदेश की छवि बदली है और लोगों का नजरिया उत्तर प्रदेश को लेकर सकारात्मक हुआ है।

राजनीति को लेकर नकारात्मक धारणा पर सवाल


विधानसभाध्यक्ष ने कहा कि आजादी के बाद से अब तक देश ने अनेक महान नेताओं को देखा है, जिन्होंने राष्ट्र को दिशा दी। उन्होंने राजनीति को लेकर बनाई गई नकारात्मक धारणा पर सवाल उठाते हुए कहा कि नेता वही बन सकता है, जिसे समाज का हर पक्ष समझ में आता हो। विधानसभा में पीएचडी किए हुए, रिटायर्ड आईएएस-आईपीएस, जमीनी कार्यकर्ता और सफाईकर्मी भी विधायक बनकर आते हैं और समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं। विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, तीनों की अपनी सीमाएं हैं, लेकिन परस्पर सहयोग, सम्मान और संवाद से ही लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं आगे बढ़ती हैं।

प्रधानमंत्री का संदेश


विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने लोकसभा अध्यक्ष की अनुमति से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश पढ़कर सुनाया। संदेश में प्रधानमंत्री ने लखनऊ में आयोजित 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसके सफल आयोजन की कामना की। उन्होंने कहा कि संवाद और विचार-विमर्श लोकतंत्र के अभिन्न अंग हैं, जो पारदर्शिता बढ़ाने और विविध मतों को सम्मान देने में सहायक होते हैं।

राष्ट्रगान से शुरुआत, सनातन परंपरा के अनुसार दीप प्रज्ज्वलन


इससे पूर्व राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति में दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्मेलन का औपचारिक उद्घाटन किया गया। सनातन परंपरा का पालन करते हुए राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेन्द्र सिंह, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया। सम्मेलन की शुरुआत सभी सदस्यों द्वारा खड़े होकर राष्ट्रगान से हुई। “भारत माता की जय” के उद्घोष से पूरा परिसर गूंज उठा।

लखनऊ में चौथी बार आयोजन


राजधानी लखनऊ में चौथी बार अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेलन में 28 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं तथा राज्यों की विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारी भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन आत्मनिरीक्षण व आत्मसुधार का मंच : माता प्रसाद


नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पाण्डेय ने सभी गण्यमान्य अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह सम्मेलन आत्मनिरीक्षण और आत्मसुधार का मंच है। लोकतंत्र केवल विजय का अवसर नहीं, बल्कि शासन और समाज के बीच निरंतर संवाद की प्रक्रिया है। संविधान सरकार से बड़ा है, और नागरिक सत्ता से ऊपर हैं।

उत्तर प्रदेश भारत का हृदय प्रदेश : हरिवंश


राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि लखनऊ तहजीब का प्रतीक है और उत्तर प्रदेश भारत का हृदय प्रदेश। काशी, प्रयाग, अयोध्या, नैमिषारण्य, चित्रकूट और सारनाथ जैसी पावन भूमि इसकी पहचान हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज अवसरों का प्रदेश बन रहा है और राज्य की जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

लघु फिल्मों से दिखी उत्तर प्रदेश की झलक


कार्यक्रम के दौरान “उत्तर प्रदेश कैसे बन रहा है सर्वोत्तम प्रदेश” विषय पर लघु फिल्म दिखाई गई। इसमें प्रदेश के तीर्थ स्थलों, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, रानी लक्ष्मीबाई, रामप्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आज़ाद, काशी की सांस्कृतिक परंपराओं, बिस्मिल्लाह खान, पंडित रविशंकर, पंडित बिरजू महाराज जैसी महान विभूतियों का चित्रण किया गया है।

तीन दिन चलेगा लोकतंत्र का मंथन


सम्मेलन के दौरान विधायी कार्यकुशलता, तकनीक का उपयोग, शिक्षा का नया युग, जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही और विकसित भारत जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा होगी। यह मंथन उत्तर प्रदेश से निकलकर देश की सभी विधानसभाओं तक लोकतांत्रिक मजबूती का संदेश देगा।

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