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योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित

बरेली: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) को निलंबित कर दिया है। उन्हें शामली के कलेक्टर ऑफिस से अटैच किया गया है। मामले की जांच मंडलायुक्त…

24GhanteOnline
January 27, 2026
3 min read
योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई, बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री निलंबित

बरेली: उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए बरेली के नगर मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) को निलंबित कर दिया है। उन्हें शामली के कलेक्टर ऑफिस से अटैच किया गया है। मामले की जांच मंडलायुक्त बरेली को सौंपी गई है। बता दें कि इससे पहले उन्होंने सरकारी नीतियों विशेषकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले पर नाराजगी जताते हुए सोमवार को सेवा से इस्तीफा दे दिया। उनके इस्तीफा ने पूरे प्रदेश के प्रशासनिक वर्ग में खलबली मचा दी थी। जिसके बाद योगी सरकार ने एक्शन लेते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।

जानकारी के मुताबिक, प्रांतीय प्रशासनिक सेवा (PCS) के 2019 बैच के अधिकारी अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने राज्यपाल और बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह को ईमेल के माध्यम से अपना इस्तीफा भेजा। सूत्रों ने बताया कि अग्निहोत्री ने इस्तीफे का कारण सरकारी नीतियों, विशेषकर यूजीसी के नए नियमों से गहरी असहमति को बताया है। कानपुर नगर के निवासी अग्निहोत्री पहले उन्नाव, बलरामपुर और लखनऊ समेत कई जिलों में एसडीएम के रूप में कार्य कर चुके हैं और प्रशासनिक हलकों में अपने स्पष्ट विचारों व सख्त कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने लगाए ये आरोप


गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लेने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने कहा कि बीते दो सप्ताह में दो बड़े निंदनीय मामले सामने आए हैं, जिन्होंने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि पहला मामला प्रयागराज माघ मेले से जुड़ा है, जहां मौनी अमावस्या के स्नान के लिए जाते समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बटुक शिष्यों को चोटी खींचकर घसीटा गया और पिटाई की गई।

इस पूरी घटना को लेकर उन्होंने स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह कृत्य बेहद निंदनीय है और वास्तविक अर्थों में प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि इस समय उनके भीतर जो पीड़ा और व्यथा है, उसे शब्दों में पूरी तरह बयान करना संभव नहीं है।

यूजीसी के नए नियमों को बताया “काला कानून”


अग्निहोत्री (Alankar Agnihotri) ने स्पष्ट किया कि अब वह इस तंत्र का हिस्सा नहीं बन सकते, क्योंकि न जनतंत्र बचा है और न गणतंत्र, अब केवल गनतंत्र शेष रह गया है। अपने इस्तीफे में अग्निहोत्री ने कहा कि जब सरकारें ऐसी नीतियां अपनाती हैं जो समाज और राष्ट्र को विभाजित करती हैं, तो उन्हें जगाना आवश्यक हो जाता है। उन्होंने यूजीसी के नए नियमों को “काला कानून” बताते हुए आरोप लगाया कि ये नियम कॉलेजों के शैक्षणिक वातावरण को दूषित कर देंगे और इन्हें तत्काल वापस लिया जाना चाहिए।

उन्होंने 13 जनवरी को प्रकाशित यूजीसी विनियम 2026 पर आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि इससे ब्राह्मण समुदाय के लोगों पर अत्याचार होंगे। उन्होंने कहा कि इसके प्रावधान भेदभावपूर्ण हैं और सामाजिक अशांति व आंतरिक असंतोष को जन्म दे सकते हैं। अग्निहोत्री ने कहा कि ब्राह्मण जनप्रतिनिधि किसी कॉरपोरेट कंपनी के कर्मचारी बनकर रह गए हैं।

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