वट सावित्री व्रत के दौरान भूलकर भी ना करें 5 गलतियां, पड़ सकता है पछताना
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री (Vat Savitri) व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान विष्णु और वट वृक्ष की पूजा करने से ना सिर्फ पति को दीर्घायु मिलती है, बल्कि घर…
ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री (Vat Savitri) व्रत रखती हैं। इस दिन भगवान विष्णु और वट वृक्ष की पूजा करने से ना सिर्फ पति को दीर्घायु मिलती है, बल्कि घर में सुख-संपन्नता भी बढ़ती है। हालांकि इस व्रत में कुछ महिलाएं जाने-अनजाने गलतियां कर बैठती हैं। आइए जानते हैं वट सावित्री के व्रत में किन गलतियों से बचना चाहिए...
- वट सावित्री व्रत (Vat Savitri) के दिन सुहागिन महिलाओं को काले और नीले कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है। इसके अलावा सफेद वस्त्र पहनने से भी बचें। इस रंग की चूड़ियां भी ना पहनें। साथ ही, पूजा में नीले रंग के फूलों का भी इस्तेमाल नहीं करें।
- यदि आप पहली बार वट सावित्री (Vat Savitri) का व्रत करने जा रही हैं तो यह व्रत ससुराल की बजाए मायके में रहकर ही करें। यदि संभव हो पाए तो पूजा का सामान भी मायके जाकर ही खरीदें।
- सुहागिनों को मासिक धर्म के समय वट सावित्री का व्रत नहीं रखना चाहिए। ऐसी स्थिति में आप चाहें तो घर में किसी दूसरी सुहागिन महिला से व्रत करवा लें और उनके साथ बैठकर कहानी को सुन लें।
- इस दिन पति के साथ झगड़ा ना पड़ें। व्रत करने वाली महिलाओं का व्यवहार संयमित रहना चाहिए। इस दिन जीवनसाथी के साथ झगड़ा करना बहुत ही अशुभ समझा जाता है।
- सुहागिन महिलाएं वट सावित्री का व्रत के दौरान बेड या पलंग पर सोने से बचे। आप जमीन पर बिस्तर बिछाकर आराम कर सकती हैं। इस दिन झूठ, घृणा या द्वेष से भी बचना चाहिए।
वट सावित्री (Vat Savitri) व्रत की पूजा विधि
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सभी कामों ने निवृत्त होकर स्नान आदि करके सुहागिन महिलाएं साफ वस्त्र धारण करने के साथ सोलह श्रृंगार कर लें। लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है
- बरगद के पेड़ के नीचे जाकर गाय के गोबर से सावित्री और माता पार्वती की मूर्ति बना लें।
- अगर गोबर उपलब्ध नहीं है तो दो सुपारी में कलावा लपेटकर सावित्री और माता पार्वती की प्रतीक के रूप में रख लें।
- इसके बाद चावल, हल्दी और पानी से मिक्स पेस्ट को हथेलियों में लगाकर सात बार बरगद में छापा लगाएं।
- अब वट वृक्ष में जल अर्पित करें।
- फिर फूल, सिंदूर, अक्षत, मिठाई, खरबूज सहित अन्य फल अर्पित करें।
- फिर 14 आटा की पूड़ियों लें और हर एक पूड़ी में 2 भिगोए हुए चने और आटा-गुड़ के बने गुलगुले रख दें और इसे बरगद की जड़ में रख दें।
- फिर जल अर्पित कर दें। और दीपक और धूप जला दें।
- फिर सफेद सूत का धागा या फिर सफेद नार्मल धागा, कलावा आदि लेकर वृक्ष के चारों ओर परिक्रमा करते हुए बांध दें।
- 5 से 7 या फिर अपनी श्रद्धा के अनुसार परिक्रमा कर लें। इसके बाद बचा हुआ धागा वहीं पर छोड़ दें।
- इसके बाद हाथों में भिगोए हुए चना लेकर व्रत की कथा सुन लें। फिर इन चने को अर्पित कर दें।
- इसके बाद सुहागिन महिलाएं माता पार्वती और सावित्री को चढ़ाए गए सिंदूर को तीन बार लेकर अपनी मांग में लगा लें।
- अंत में भूल चूक के लिए माफी मांग लें।
- इसके बाद महिलाएं अपना व्रत खोल सकती हैं।
- व्रत खोलने के लिए बरगद के वृक्ष की एक कोपल और 7 चना लेकर पानी के साथ निगल लें।
- इसके बाद आप प्रसाद के रूप में पूड़ियां, गुलगुले आदि खा सकती हैं।
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