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डबल इंजन सरकार का लक्ष्य: 'प्रत्येक हाथ हो सक्षम': उप मुख्यमंत्री

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने कहा है कि राज्य की डबल इंजन सरकार का मुख्य लक्ष्य "प्रत्येक हाथ को सक्षम" बनाना है। इसी विजन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या को…

24GhanteOnline
June 8, 2026
3 min read

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने कहा है कि राज्य की डबल इंजन सरकार का मुख्य लक्ष्य "प्रत्येक हाथ को सक्षम" बनाना है। इसी विजन के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी की समस्या को जड़ से समाप्त करने और ग्रामीण युवाओं के हुनर को निखारने के लिए 'ग्राम्य विकास ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान' (RSETIs) अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह खास संस्थान ग्रामीण बी.पी.एल. (गरीबी रेखा से नीचे) परिवारों के युवाओं को जरूरी कौशल प्रशिक्षण और स्किल अपग्रेडेशन देने के लिए समर्पित हैं।

उप मुख्यमंत्री (Keshav Maurya) ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रदेश के प्रत्येक जनपद में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण का आयोजन वृहद् स्तर पर कराया जाए, जिससे स्थानीय स्तर पर ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हो सकें। उन्होंने बताया कि इन संस्थानों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा अधिकतम 1 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त अनुदान सहायता प्रदान की जाएगी।

बैंकों से मिलेगा आसानी से ऋण (क्रेडिट लिंकेज)


केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने स्पष्ट किया कि युवाओं को केवल प्रशिक्षण देकर ही नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद, उन्हें अपना खुद का उद्यम (Business) शुरू करने के लिए बैंकों द्वारा क्रेडिट लिंकेज (ऋण) सहायता भी सुनिश्चित कराई जाएगी। इससे युवाओं को अपनी पूंजी खड़ी करने में प्रशासनिक व वित्तीय मदद मिलेगी।

60 से अधिक ट्रेडों में प्रशिक्षण और पात्रता


संस्थानों में कृषि, सिलाई, कंप्यूटर, ब्यूटी पार्लर और इलेक्ट्रीशियन जैसे 60 से अधिक प्रकार के वोकेशनल कोर्सेज (Vocational Courses) में निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

पात्रता: 18 से 45 वर्ष के बीच का कोई भी ग्रामीण युवा इस प्रशिक्षण के लिए पात्र है।

आरक्षण व प्राथमिकता: सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए इसमें 70% सीटें गरीबी रेखा से नीचे (BPL) वाले परिवारों के लिए आरक्षित हैं। साथ ही, SGSY गाइडलाइंस के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST), अल्पसंख्यकों, दिव्यांगों और महिलाओं को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी।

प्रशिक्षण कार्यक्रमों का वर्गीकरण:


1. खाद्य प्रसंस्करण कार्यक्रम: जैसे डेयरी, पोल्ट्री (मुर्गी पालन), मधुमक्खी पालन, बागवानी, रेशम कीट पालन, मशरूम की खेती, फूलों की खेती और मत्स्य पालन आदि।
2. उत्पाद कार्यक्रम: पुरुषों और महिलाओं के लिए ड्रेस डिज़ाइनिंग, रेक्सिन की वस्तुएँ, अगरबत्ती बनाना, फुटबॉल बनाना, बैग निर्माण, बेकरी उत्पाद, पत्तों के कप (दोना-पत्तल) बनाना और रीसायकल किए गए कागज़ का निर्माण आदि।
3. प्रक्रिया (सर्विस) कार्यक्रम: दोपहिया वाहन की मरम्मत, रेडियो/टीवी की मरम्मत, मोटर रिवाइंडिंग, इलेक्ट्रिकल ट्रांसफॉर्मर की मरम्मत, सिंचाई पंप-सेट की मरम्मत, ट्रैक्टर और पावर टिलर की मरम्मत, सेल फोन (मोबाइल) की मरम्मत, ब्यूटीशियन कोर्स, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी, स्क्रीन प्रिंटिंग, घरेलू बिजली के उपकरणों की मरम्मत, कंप्यूटर हार्डवेयर और DTP।
4. सामान्य कार्यक्रम: महिलाओं के लिए विशेष कौशल विकास, SGSY SHG (स्वयं सहायता समूह) के लिए बेसिक ओरिएंटेशन प्रोग्राम कोर्स, तथा माइक्रो एंटरप्राइज़ और वेतन-रोज़गार/प्लेसमेंट के लिए कौशल विकास कार्यक्रम।

उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए ताकि गांवों के अंतिम पायदान पर बैठे युवाओं तक इसका लाभ पहुँच सके और उत्तर प्रदेश आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से कदम बढ़ा सके।

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