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आरटीई में ऐतिहासिक उछाल, प्रथम चरण के आवेदनों की संख्या हुई दुगुनी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना के प्रति अभिभावकों का बढ़ता विश्वास इस वर्ष ऐतिहासिक आंकड़ों के रूप में सामने आया है। योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, सरलता और…

24GhanteOnline
February 19, 2026
3 min read
आरटीई में ऐतिहासिक उछाल, प्रथम चरण के आवेदनों की संख्या हुई दुगुनी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना के प्रति अभिभावकों का बढ़ता विश्वास इस वर्ष ऐतिहासिक आंकड़ों के रूप में सामने आया है। योगी सरकार ने शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, सरलता और व्यापक जनजागरूकता पर विशेष बल दिया। इसके सकारात्मक परिणाम वर्ष 2026–27 के प्रथम चरण के आवेदनों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। प्रथम चरण में कुल 2,61,501 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जबकि गत वर्ष 2025–26 में इसी अवधि में 1,32,446 आवेदन आए थे। इस प्रकार आवेदनों में लगभग 97 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। यह वृद्धि न केवल योजना की बढ़ती लोकप्रियता को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के अभिभावकों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रति जागरूकता और विश्वास पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ हुआ है।

जागरूकता और सरलीकरण बना सफलता का आधार


प्रदेश सरकार ने आरटीई (RTE) योजना को समाज के अंतिम पायदान तक पहुंचाने के लिए बहुआयामी प्रयास किए। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित अभिभावक-उन्मुख संवाद कार्यक्रम, स्थानीय स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार, ग्राम और वार्ड स्तर पर जागरूकता अभियान तथा आवेदन प्रक्रिया के सरलीकरण ने योजना की स्वीकार्यता को नई ऊंचाई दी। ऑनलाइन आवेदन प्रणाली को अधिक उपयोगकर्ता के लिए अनुकूल बनाया गया जिससे ग्रामीण एवं अर्द्धशहरी क्षेत्रों के अभिभावकों को भी सहजता से आवेदन करने का अवसर मिला। साथ ही, समयबद्ध सूचना उपलब्ध कराने, हेल्पडेस्क की व्यवस्था और विद्यालयों की जवाबदेही सुनिश्चित करने जैसे कदमों ने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया।

समावेशी शिक्षा की दिशा में मजबूत कदम


आरटीई (RTE) योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्लूएस) एवं वंचित वर्ग (डीजी) के बच्चों को निजी विद्यालयों में निःशुल्क प्रवेश का प्रावधान है। बढ़ते आवेदनों से स्पष्ट है कि अभिभावक अब इस अवसर को लेकर अधिक जागरूक और आश्वस्त हैं। योगी सरकार की प्राथमिकता रही है कि शिक्षा सामाजिक सशक्तीकरण का माध्यम बने। नई शिक्षा नीति, डिजिटल प्लेटफॉर्म के विस्तार, विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं के उन्नयन और नामांकन अभियानों ने मिलकर एक ऐसा वातावरण तैयार किया है, जिसमें हर वर्ग के बच्चों को समान अवसर मिल सके।

सामाजिक परिवर्तन का संकेत


बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि आवेदनों में लगभग दोगुनी वृद्धि केवल सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सोच में आए सकारात्मक परिवर्तन का भी द्योतक है। अब अभिभावक गुणवत्तापूर्ण विद्यालयी शिक्षा को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला मानते हुए सक्रिय रूप से योजना का लाभ उठाने के लिए आगे आ रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि आरटीई के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र बच्चों को लाभान्वित किया जाए और नामांकन प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी, समयबद्ध और न्यायसंगत बनाया जाए।

Tags:RTE

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