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कचरे से कंचन बनेगी यूपी की सड़कें: डिप्टी सीएम की पहल पर ग्रामीण इलाकों में बिछेगा प्लास्टिक रोड का जाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) के अथक प्रयासों और दूरदर्शी सोच के चलते आज प्रदेश में ग्रामीण कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण…

24GhanteOnline
June 4, 2026
3 min read

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) के अथक प्रयासों और दूरदर्शी सोच के चलते आज प्रदेश में ग्रामीण कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण UPRRDA के अधीन प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के अन्तर्गत ग्रामीण मार्गों के निर्माण में न केवल गति आई है, बल्कि इसमें नवाचार (Innovation) और पर्यावरण संरक्षण को भी सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

इसी क्रम में प्रदेश सरकार द्वारा एक अभिनव पहल करते हुए सड़क निर्माण में 'वेस्ट प्लास्टिक तकनीक' (Waste Plastic Technology) का व्यापक उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के तहत सड़कों की ऊपरी सतह (Bituminous Concrete) तैयार करने में प्लास्टिक कचरे का मिश्रण किया जा रहा है। यह अनूठा प्रयास सड़क निर्माण को अधिक टिकाऊ, मजबूत और पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) बना रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ टिकाऊ विकास


उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Maurya) ने इस संबंध में विस्तार से जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों का विकास ही प्रदेश की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा: "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के 'कचरे से कंचन' (Waste to Wealth) के विजन को धरातल पर उतारते हुए उत्तर प्रदेश में प्लास्टिक कचरे का उपयोग सड़कों के निर्माण में किया जा रहा है। इससे जहां एक तरफ पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले प्लास्टिक कचरे का सही निस्तारण हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण सड़कों की उम्र और गुणवत्ता में भारी इजाफा हो रहा है।

वेस्ट प्लास्टिक तकनीक के मुख्य लाभ:


• अत्यधिक मजबूती और टिकाऊपन : पारंपरिक सड़कों की तुलना में प्लास्टिक मिश्रित सड़कों की भार वहन क्षमता अधिक होती है, जिससे भारी वाहनों के चलने पर भी सड़कें जल्दी नहीं टूटतीं।
• जल-प्रतिरोधी क्षमता: यह तकनीक सड़कों को वाटर-प्रूफिंग प्रदान करती है, जिससे बरसात के दिनों में पानी के ठहराव के बावजूद सड़कों पर गड्ढे नहीं बनते।
• लागत में कमी: बिटुमेन (डामर) के साथ प्लास्टिक कचरे का उपयोग करने से निर्माण लागत में कमी आती है, जिससे सरकारी धन की भी बचत हो रही है।
• कार्बन फुटप्रिंट में कमी: प्लास्टिक को खुले में जलाने या डंप करने के बजाय सड़कों में रीसायकल करने से कार्बन उत्सर्जन में भारी कमी आ रही है।

सशक्त और आत्मनिर्भर ग्रामीण भारत का संकल्प


प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से आज उत्तर प्रदेश के सुदूर गांवों को बारहमासी पक्की सड़कों से जोड़ा जा चुका है। आधुनिक तकनीक, पर्यावरणीय उत्तरदायित्व और उच्च गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना (Infrastructure) का यह बेहतरीन समन्वय ग्रामीण भारत को सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रहा है।

इन मजबूत सड़कों के बनने से ग्रामीणों को स्वास्थ्य, शिक्षा और मंडियों तक पहुंचने में सुगमता हो रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सीधे तौर पर गति मिल रही है। उप मुख्यमंत्री (Keshav Maurya) ने स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और भविष्य में इस तकनीक का दायरा और अधिक बढ़ाया जाएगा।

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