मुख्यमंत्री शिक्षक सुरक्षा कैशलेस चिकित्सा योजना बनी वरदान, मात्र 10 दिनों में 142 शिक्षकों को मिला लाभ
लखनऊ: मुख्यमंत्री शिक्षक सुरक्षा कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ होने के बाद महज 10 दिनों में शिक्षकों और उनके परिवार ने योजना का लाभ लेना शुरू कर दिया है। महज 10 दिनों में प्रदेशभर में अब तक कुल 142 प्री-ऑथराइजेशन…

लखनऊ: मुख्यमंत्री शिक्षक सुरक्षा कैशलेस चिकित्सा योजना का शुभारंभ होने के बाद महज 10 दिनों में शिक्षकों और उनके परिवार ने योजना का लाभ लेना शुरू कर दिया है। महज 10 दिनों में प्रदेशभर में अब तक कुल 142 प्री-ऑथराइजेशन स्वीकृत किए जा चुके हैं। इन मामलों में उपचार की कुल अनुमानित लागत लगभग 37.81 लाख रुपये है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 8 जुलाई 2026 को इस योजना का औपचारिक शुभारंभ किया था। इसके बाद से योजना को तेजी से लागू करते हुए पात्र शिक्षकों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उपलब्ध कराया जा रहा है।
बेसिक से 128 और माध्यमिक से 14 मामले आए
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के शुभांरभ के बाद अब तक स्वीकृत 142 प्रकरणों में बेसिक शिक्षा विभाग के 128 मामले शामिल हैं, जिनमें उपचार की अनुमानित लागत 34.15 लाख रुपये है। वहीं माध्यमिक शिक्षा विभाग के 14 मामलों में लगभग 3.66 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इससे स्पष्ट है कि प्रदेश के दोनों प्रमुख शिक्षा वर्गों के शिक्षक योजना का लाभ उठा रहे हैं। इनमें सबसे अधिक 52 मामले जनरल मेडिसिन से जुड़े हैं।
इसके अलावा जनरल सर्जरी के 28, ऑर्थोपेडिक्स के 15, यूरोलॉजी के 9, मेडिकल ऑन्कोलॉजी के 8, नवजात शिशु देखभाल के 6, प्रसूति एवं स्त्री रोग के 6, नेत्र रोग के 6 तथा कार्डियोलॉजी के 4 मामलों में उपचार की स्वीकृति दी गई है। अन्य विभिन्न विशेषज्ञताओं में भी मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया गया है।
अब तक 47 जनपदों के शिक्षकों और उनके परिजनों के उपचार को मिली स्वीकृति
वहीं अब तक 47 जनपदों के शिक्षकों के उपचार को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। सर्वाधिक 12 मामले गोरखपुर से सामने आए हैं। इसके बाद प्रयागराज से 7 तथा जौनपुर, मुरादाबाद और वाराणसी से 6-6 मामले स्वीकृत हुए हैं। बुलंदशहर, देवरिया और अयोध्या से 5-5 तथा आगरा, अलीगढ़, आजमगढ़, बिजनौर, कौशांबी, मऊ और पीलीभीत से 4-4 मामलों को स्वीकृति मिली है।
वहीं उपचार राशि के आधार पर वाराणसी सबसे आगे है, जहां लगभग 3.19 लाख रुपये के उपचार स्वीकृत किए गए हैं। इसके बाद गोरखपुर में 2.39 लाख रुपये, प्रयागराज में 2.21 लाख रुपये, फतेहपुर में 2.02 लाख रुपये, बदायूं में 1.61 लाख रुपये, जालौन में 1.55 लाख रुपये तथा हरदोई में 1.45 लाख रुपये की चिकित्सा स्वीकृत की गई है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि योजना गंभीर चिकित्सा आवश्यकताओं को भी प्रभावी ढंग से पूरा कर रही है।
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