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यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा: दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेंगे, रिसर्च और स्टार्टअप्स को मिलेगी बड़ी मदद

लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिनके जरिए उच्च स्तर का रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर…

24GhanteOnline
January 20, 2026
3 min read
यूपी में ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा: दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनेंगे, रिसर्च और स्टार्टअप्स को मिलेगी बड़ी मदद

लखनऊ | उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जिनके जरिए उच्च स्तर का रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार होगा। इस पूरी योजना के लिए सरकार की ओर से कुल 50 करोड़ रुपये तक की शत-प्रतिशत वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसका मकसद ग्रीन हाइड्रोजन तकनीक को सस्ता, व्यावहारिक और उद्योग के अनुकूल बनाना है। सरकारी योजना के अनुसार, ये दोनों सेंटर ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीकों पर काम करेंगे। इन्हें देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से संचालित किया जाएगा। यहां होने वाला शोध सीधे उद्योग की जरूरतों से जुड़ा होगा, ताकि प्रयोगशाला से निकलने वाली तकनीक जमीन पर भी आसानी से लागू की जा सके। इस फंड से आधुनिक लैब, परीक्षण सुविधाएं और अत्याधुनिक रिसर्च ढांचा तैयार किया जाएगा।

ग्रीन एनर्जी की दिशा में यह पहल भारत के वर्ष 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। इसी क्रम में गोरखपुर में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) प्लांट का उद्घाटन पहले ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कर चुके हैं, जिससे करीब 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आने का अनुमान है। इसके अलावा प्रदेश में कई अन्य ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाएं भी प्रस्तावित हैं। सरकार स्टार्टअप इकोसिस्टम को भी मजबूती देने पर जोर दे रही है।

ग्रीन हाइड्रोजन नीति (Green Hydrogen Policy) के तहत मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के इनक्यूबेटर से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इससे युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता के नए अवसर मिलेंगे और उत्तर प्रदेश ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का एक प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगा। ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में यूपी की बड़ी पहल, बनेंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस उत्तर प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठा रही है।

प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए जाएंगे, जहां आधुनिक शोध और तकनीकी विकास पर काम होगा। इन केंद्रों के जरिए राज्य को ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की तैयारी है। इन दोनों सेंटरों के लिए सरकार की ओर से 50 करोड़ रुपये तक की पूरी वित्तीय सहायता दी जाएगी। इस राशि से हाई-एंड रिसर्च इंफ्रास्ट्रक्चर, आधुनिक प्रयोगशालाएं और परीक्षण सुविधाएं तैयार होंगी। यहां होने वाला शोध उद्योग की जरूरतों के अनुसार होगा, ताकि तकनीक को जमीन पर आसानी से लागू किया जा सके। ग्रीन एनर्जी की यह पहल देश के 2070 तक नेट ज़ीरो कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य से जुड़ी है। गोरखपुर में पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट (Green Hydrogen Plant) की शुरुआत हो चुकी है, जिससे कार्बन उत्सर्जन में बड़ी कमी आने की उम्मीद है। आने वाले समय में प्रदेश में और भी ऐसी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। सरकार ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को भी आगे बढ़ाने पर जोर दे रही है।

मान्यता प्राप्त संस्थानों से जुड़े स्टार्टअप्स को पांच साल तक हर साल 25 लाख रुपये तक की मदद मिलेगी। इससे युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और उत्तर प्रदेश ग्रीन टेक्नोलॉजी का मजबूत केंद्र बन सकेगा।

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