शनिदेव को करना है प्रसन्न, इन उपायों से मिलेंगे कई फायदे
शनि देव (Shani Dev) की आराधना के लिए सबसे अच्छा दिन शनिवार माना जाता है. कहते हैं शनि (Shani) की जिस पर भी वक्री दृष्टि होती है उसके जीवन में कई सारी समस्याएं आती हैं. वहीं यदि शनि देव (Shani Dev) जातक पर प्रसन्न रहें…
शनि देव (Shani Dev) की आराधना के लिए सबसे अच्छा दिन शनिवार माना जाता है. कहते हैं शनि (Shani) की जिस पर भी वक्री दृष्टि होती है उसके जीवन में कई सारी समस्याएं आती हैं. वहीं यदि शनि देव (Shani Dev) जातक पर प्रसन्न रहें तो उसे रंक से राजा भी बना सकते हैं. हिंदू धर्म में नौ ग्रहों में शनि भी एक ग्रह है जो जातक को उसके कर्म के अनुसार फल देने के लिए जाना जाता है. अगर किसी व्यक्ति का कर्म अच्छा है तो उसे निश्चित तौर पर अच्छा फल मिलेगा. वहीं अगर उसके कर्म खराब हैं तो शनिदेव (Shani Dev) उसे उसके कर्मों की सजा देते हैं.
शनिदेव (Shani Dev) को प्रसन्न करने के लिए भोपाल के रहने वाले ज्योतिष पंडित हितेन्द्र कुमार शर्मा ने शनिवार के दिन उपाय (Shanivar ke Upay) करने व उन उपायों से मिलने वाले फायदे के बारे में बताया है. आइए जानते हैं.
शनिवार के दिन करें ये काम
- शनिवार का व्रत करें
- छाया का दान करें
- विभूति, लाल चंदन या भस्म लगाएं
- सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करें
- शमी के वृक्ष पर जल अर्पित करें
- जिस व्यक्ति की कुंडली में शनि सातवें अथवा ग्यारहवें भाव में हैं या फिर मकर, कुंभ या तुला में है तो कोई बात नहीं लेकिन इसके अलावा कोई और भाव में शनि है तो जातक के लिए शनिवार का उपवास करना शुभ माना जाता है. लगातार शनिवार का व्रत करने से व्यक्ति के पाप कम होते हैं साथ ही नीच का शनि पीड़ा नहीं देता.
- यदि किसी जातक की कुंडली में शनि की साढ़ेसाती या ढैया चल रही है या फिर शनि नीच का होकर कष्ट दे रहा है तो उस व्यक्ति को छाया का दान करना चाहिए.
- गुरु का साथ प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को विभूति, लाल चंदन या भस्म लगाना चाहिए. जब गुरु का साथ मिलता है तो शनि के अच्छे फल मिलना प्रारंभ हो जाता है. किसी भी कार्य में कोई भी बाधा उत्पन्न नहीं होती और सारे काम आसानी से सफल हो जाते हैं.
- यदि किसी जातक की कुंडली में पितृदोष का प्रभाव है तो उस व्यक्ति को हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए. इसके अलावा हर शनिवार व्रत रखते हुए सुंदर कांड या फिर बजरंग बाण का पाठ जरूर करें.
- शमी के वृक्ष को साक्षात शनि देव मानकर उसमें जल अर्पित करना चाहिए. शमी के पेड़ में जल चढ़ाने या फिर उसकी देखरेख करने से शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
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