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लोककलाओं को वैश्विक पहचान दिला रहा ‘यूपी मॉडल’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में संस्कृति को केवल संरक्षण तक सीमित न रखकर उसे पहचान, सम्मान व आजीविका से जोड़ने का एक सशक्त सुव्यवस्थित मॉडल विकसित किया गया…

24GhanteOnline
January 29, 2026
2 min read
लोककलाओं को वैश्विक पहचान दिला रहा ‘यूपी मॉडल’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीते कुछ वर्षों में प्रदेश में संस्कृति को केवल संरक्षण तक सीमित न रखकर उसे पहचान, सम्मान व आजीविका से जोड़ने का एक सशक्त सुव्यवस्थित मॉडल विकसित किया गया है। यह मॉडल आज ‘यूपी मॉडल ऑफ कल्चरल रिवाइवल’ के रूप में जाना जा रहा है, जिसके माध्यम से लोक कलाओं (Folk Arts) का पुनर्जागरण हुआ है और भारत की सॉफ्ट पावर को वैश्विक मंचों पर नई मजबूती मिली है।

प्रदेश की विविध लोक परंपराओं पर नजर डालें तो बुन्देलखण्ड के आल्हा गायन और राई नृत्य से लेकर पूर्वांचल की कजरी, चैती व बिरहा जैसी विधाएं समय के साथ हाशिये पर चली गई थीं। बीते लगभग नौ वर्षों में संस्कृति विभाग के माध्यम से इन लोक कलाओं का व्यवस्थित दस्तावेजीकरण, प्रशिक्षण व मंचन किया गया। लोक कलाकारों के डिजिटल प्रोफाइल, वीडियो आर्काइव और राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुतियों ने पारंपरिक कलाओं को आधुनिक पहचान के साथ वैश्विक मंच तक पहुंचाया है।

अयोध्या का दीपोत्सव, काशी की देव-दीपावली और ब्रज का रंगोत्सव जैसे आयोजनों को पर्यटन से जोड़कर सरकार ने स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और स्वयं सहायता समूहों के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित किए हैं। दीपोत्सव जैसे आयोजनों में हर वर्ष हजारों कलाकारों व कारीगरों को प्रत्यक्ष कार्य मिलता है, वहीं इन उत्सवों के चलते घरेलू व विदेशी पर्यटकों की संख्या में निरंतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे ग्रामीण व स्थानीय अर्थव्यवस्था को सीधा लाभ मिला है।

‘यूपी गौरव सम्मान’ व कलाकार पेंशन योजनाओं के माध्यम से दशकों से उपेक्षित लोक कलाकारों को न केवल आर्थिक सुरक्षा मिली, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा भी प्राप्त हुई है। यह पहला अवसर है जब पारंपरिक लोक कलाओं (Folk Arts) को धरोहर और मनोरंजन के साथ-साथ स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में स्थापित किया गया है।

जी-20 जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उत्तर प्रदेश की लोक कलाओं (Folk Arts) की प्रभावी प्रस्तुतियों ने भारत की सॉफ्ट पावर को नई धार दी है। वहीं अयोध्या, काशी और मथुरा जैसे धार्मिक केंद्रों के कायाकल्प ने आस्था के साथ संस्कृति को भी विश्वस्तरीय मंच प्रदान किया है। यूपी का यह सांस्कृतिक मॉडल साबित करता है कि विरासत का संरक्षण आर्थिक विकास व वैश्विक प्रभाव का भी मजबूत आधार बन सकता है।

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