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योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन हाइड्रोजन में टेक्नोलॉजी लीडर बनने की ओर उत्तर प्रदेश

लखनऊ। उतर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के लिए एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन पालिसी (Green Hydrogen Policy) के अंतर्गत शोध…

24GhanteOnline
January 19, 2026
2 min read
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में ग्रीन हाइड्रोजन में टेक्नोलॉजी लीडर बनने की ओर उत्तर प्रदेश

लखनऊ। उतर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के लिए एक्शन प्लान पर काम शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ग्रीन हाइड्रोजन पालिसी (Green Hydrogen Policy) के अंतर्गत शोध (रिसर्च), नवाचार (इनोवेशन) और स्टार्टअप इकोसिस्टम को नयी धार देने जा रही है। इस रणनीति के तहत प्रदेश में दो सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित किये जायेंगे और ग्रीन हाइड्रोजन से जुड़े स्टार्टअप्स को 05 सालों तक वित्तीय सहायता दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि ग्रीन हाइड्रोजन की लागत घटाकर उत्तर प्रदेश को देश की ग्रीन एनर्जी टेक्नोलॉजी का प्रमुख केंद्र बनाया जाए। 

योजना के अंतर्गत उत्तर प्रदेश में दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किये जाएंगे, जिनका उद्देश्य ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़ी तकनीक विकसित करना और लागत को न्यूनतम करना है। दोनों सेंटर देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से स्थापित किए जाएंगे। इसमें होने वाले शोध कार्यों का उद्देश्य प्रत्यक्ष रूप से इंडस्ट्री की मांग और आवश्यकताओं के अनुरूप दक्षता विकसित करना होगा। सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को अधिकतम 50 करोड़ रुपये तक की सौ प्रतिशत वित्तीय सहायता उपलब्ध करायी जाएगी, जिससे अत्याधुनिक लैब और परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें। 

वर्ष 2070 तक देश को नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करना है। इस राष्ट्रीय लक्ष्य को प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश बड़ी और प्रभावी भूमिका निभाने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ग्रीन हाइड्रोजन टेक्नोलॉजी का निर्माण केंद्र बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाता जा रहा है। गोरखपुर जिले में प्रदेश के पहले ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट (Green Hydrogen Plant) का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा किया जा चुका है। अनुमान है कि इस प्लांट के माध्यम से 500 टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।

इसके अलावा ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) को लेकर उत्तर प्रदेश में कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं। इसी सोच के साथ ग्रीन हाइड्रोजन नीति में स्टार्टअप्स के लिए भी बड़ा प्रोत्साहन रखा गया है। उन्हें 5 साल तक, हर साल अधिकतम 25 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। शर्त यह है कि ये स्टार्टअप्स किसी मान्यता प्राप्त शैक्षणिक संस्थान के इनक्यूबेटर से जुड़े हों। इससे जहां एक ओर युवाओं को शोध आधारित उद्यमिता का अवसर  मिलेगा, वहीं उद्योग को नई तकनीक सुलभ होंगी।

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