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सेना के जवान के परिवार को मिलेगा 29 लाख मुआवजा, हाईकोर्ट ने UPSRTC की याचिका खारिज की

उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) ने अपने एक अहम फैसले में 15 साल पहले हुए एक सड़क हादसे में मारे गए भारतीय सेना के एक जवान के परिवार को दिए गए करीब 29 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा है। कोर्ट का मानना है…

24GhanteOnline
February 12, 2026
2 min read
सेना के जवान के परिवार को मिलेगा 29 लाख मुआवजा, हाईकोर्ट ने UPSRTC की याचिका खारिज की

उत्तराखंड हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) ने अपने एक अहम फैसले में 15 साल पहले हुए एक सड़क हादसे में मारे गए भारतीय सेना के एक जवान के परिवार को दिए गए करीब 29 लाख रुपये के मुआवजे को बरकरार रखा है। कोर्ट का मानना है कि यह हादसा ड्राइवर की लापरवाही के वजह से हुआ जब परिवहन निगम की बस एक खड़े ट्रक से टकरा गई।

जस्टिस पंकज पुरोहित की सिंगल बेंच ने कल बुधवार को पिथौरागढ़ मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल के उस आदेश को बरकरार रखा है जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) को मृतक जवान के परिवार को ब्याज समेत 28।91 लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया था। साथ ही कोर्ट ने परिवहन निगम की अपील भी खारिज कर दी।

ड्राइवर की लापरवाही से हुआ हादसाः कोर्ट(Uttarakhand High Court) 


हाई कोर्ट (Uttarakhand High Court) ने साल 2011 में एक सड़क हादसे में मारे गए भारतीय सेना के एक जवान के परिवार को दिए गए मुआवजे के फैसले को बरकरार रखा है। कोर्ट (Uttarakhand High Court) ने सुनवाई के दौरान माना कि यह हादसा ड्राइवर की लापरवाही की वजह से हुआ था। लापरवाही की वजह से ही परिवहन निगम की बस एक खड़े ट्रक से टकरा गई जिसकी वजह से सेना के जवान की मौत हो गई।

भारतीय सेना की 5वीं गार्ड्स रेजिमेंट के नायक गणेश सिंह 7 जुलाई, 2011 को उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की बस में उत्तर प्रदेश के बरेली शहर से उत्तराखंड के टनकपुर जा रहे थे। लेकिन कुछ समय बाद बस ड्राइवर ने नियंत्रण खो दिया और गाड़ी सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से टकरा गई।

इस हादसे की वजह से गणेश सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और हॉस्पिटल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने कोर्ट के समक्ष दावा करते हुए अपना पक्ष रखा कि यह हादसा एक साइकिल सवार को बचाने की कोशिश में हो गया और ट्रक भी गलत जगह पर पार्क किया गया था। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना।

हाई कोर्ट ने इस आधार पर दलील खारिज कर दी कि बस ड्राइवर को गवाह के तौर पर पेश नहीं किया गया और दावे को सपोर्ट करने के लिए कोई सबूत भी पेश नहीं किया गया।

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