अहीर रेजिमेंट के लिए शुरू हुई संघर्ष यात्रा, 19 जून को दिल्ली में जारी रहेगा अनशन

अहीर रेजिमेंट
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हरियाणा। अखिल भारतीय यादव सेवक समाज के मुख्य संरक्षक स्वामी सुधानंद योगी ,स्वामी हरीश मुनि ख्वासपुर जी महाराज ,अध्यक्ष कर्नेल राजेंद्र यादव, उपाध्यक्ष सतीश खोला ,महामंत्री अमन यादव, कर्नल घीसाराम महेंदरगढ़ यादव समाज प्रधान डॉ प्रेमराज ,रविंदर यादव सरपंच मोहलड़ा ,संदीप डुंगरवास ,अजीत सिंह यादव समाजसेवी डॉ ईश्वर यादव गोद के सरपंच रतीराम ,अमर सिंह यादव  कृष्ण यादव ,अन्नू कुमार ,कर्ण सिंह ,राजिंदर सरपंच जुडी व दर्जनों अहीर समाज के प्रतिनिधियों ने अहीर रेजीमेंट के गठन के लिए गोद बलावा से संघर्ष यात्रा शुरू की।

रेजीमेंट गठित करने की पहल , 19 को दिल्ल्ली के रामलीला मैदान पहुंचेगें 

उन्होने सामूहिक रूप से कहा की देश मे अनेकों रेजीमेंट गठित है जैसे: (1) आसाम रेजिमेंट, (2) नागा रेजिमेंट, (3) आसाम राईफल्स, (4) बिहार रेजिमेंट, (5) जम्मू कश्मीर राईफल्स, (6) जम्मू कश्मीर लाइट इन्फेंट्री ,(7) डोगरा रेजीमेंट,(8) डोगरा स्काउट्स, (9) कुमाऊं रेजीमेंट,(10)गढ़वाल राईफल्स, (11) गढ़वाल स्काउट्स, (12) महार रेजीमेंट ,(13) मद्रास रेजिमेंट ,(14) राजपूताना रेजीमेंट, (15) राजपूत राईफल्स ,(16) जाट रेजीमेंट, (17) ग्रेनेडियर्स रेजीमेंट, (18) पंजाब रेजिमेंट ,(19) सिख रेजीमेंट, (20) सिख लाइट इन्फेंट्री, (21) गार्ड्स रेजिमेंट, (22) मराठा लाइट इन्फेंट्री ,(23) गोरखा रेजिमेंट, (24) आर्मड रेजीमेंट ,(25) तोपखाना, (26) लद्दाख स्काउट्स ।

उन्होने खेद जताया की अहीर/ यादव रेजिमेंट नहीं है जो कि पूर्णतया असंवैधानिक और समानता के मौलिक अधिकार का खूल्ल्म-खूल्ला हनन है । उन्होने तर्क देते हुए कहा की   अहीर/ यादव समाज देश का सबसे बड़ा समाज है। 2011 के सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना के अनुसार अहीर समाज की देश में जनसंख्या 28 करोड़ है जो कि उस समय के हिसाब से 23% है इस तथ्य की पुष्टि  गृह मंत्रालय भारत सरकार से की जा सकती हैं ।

समानता के मौलिक अधिकार की कही बात 

समानता के मौलिक अधिकार का हनन: संविधान की धारा 14 के तहत देश के सभी नागरिकों को समानता का मौलिक अधिकार है परंतु सेना में रेजिमेंट के गठन को लेकर समानता के मौलिक अधिकार का खूल्ल्म-खूल्ला हनन हो रहा है क्योंकि भारतीय सेना में अहीर/यादव रेजिमेंट नहीं है ।भेदभाव की नीति: उल्लेखनीय है कि वर्तमान में भारतीय समाज में राजपूत समाज की आबादी मात्र 4% है जबकि उनकी दो-दो रेजिमेंट है इसी प्रकार सिख समाज की आबादी मात्र 2% है जबकि उनकी तो तीन-तीन रेजीमेंट है इसी प्रकार जाट समाज की आबादी 1.76 % है जबकि उनकी अपनी रेजीमेंट है उसी प्रकार डोगरा, गढ़वाल, जम्मू कश्मीर, नागा ,आसामी इन सब की आबादी 1 से 2% के बीच में है और इन सभी की अपनी-अपनी रेजिमेंट है और देश  मे अहीर समाज 23% होने के बावजूद चार -पाँच तो दूर की बात है एक भी रेजिमेंट नहीं है ।

संविधान सर्वोपरि: माननीय उच्चतम न्यायालय कई बार संवैधानिक व्याख्या कर चुका है कि देश में ना तो विधायिका ना ही कार्यपालिका और ना ही न्यायपालिका सर्वोपरि है । भारत देश में तो केवल देश का संविधान ही सर्वोपरि है । इसलिए भारतीय सेना में अहीर/यादव रेजिमेंट का गठन करना नितांत आवश्यक एवं संविधान संमत है ।लोकतंत्र की विडंबना: लोकतंत्र में बहुमत का शासन होता है  ना की अल्पमत का।

अहीर रेजिमेंट स्थापित करने की पहल 

वर्तमान में देश में छोटे-छोटे समाजों की रेजिमेंट बनाई हुई है इसलिए देश में यादव समाज सबसे बड़ा समाज होने के बावजूद भी इसकी रेजिमेंट क्यों नहीं है ? लोकतंत्र में इससे बड़ी विडंबना ओर क्या हो सकती है ? अतार्किक एवं अव्यवहारिक दलील: जब भी अहीर समाज अहीर/यादव रेजिमेंट की मांग करता है तो तर्क दिया जाता है कि भारतीय संविधान में धर्म,जाति, क्षेत्र, लिंग आदि के आधार पर भारतीय सेना में अहीर/यादव रेजिमेंट का गठन नहीं किया जा सकता । यदि यह तर्क भी तर्कसंगत है तो अन्य जाति आधारित रेजिमेंट भी असंवैधानिक है । क्योंकि 26 जनवरी 1950 के बाद संविधान के तहत ही देश का शासन एवं प्रशासन चलेगा ना कि इसके पहले की व्यवस्था के अनुरुप ।

राष्ट्रहित: मान्यवर आप राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक रूप से देश की सभी प्रकार की समस्याओं एवं उनके समाधान के ज्ञाता हो इसलिए राष्ट्रहित में और लोकतंत्र हित में अहीर/यादव रेजिमेंट का गठन करना समय की मांग है क्योंकि “यह एक एतिहासिक सच्चाई है” अन्यथा देश एक प्रकार से लोकतंत्र  का मजाक बनकर रह जाएगा क्योंकि देश का सबसे बड़ा समाज अपने समाज के मौलिक अधिकार से वंचित रह जाएगा ।

अहीरों ने भी कई बार देश देश के हित लिए दिया बलिदान

सेवक समाज वक्ताओ ने दावा किया की अहीर/यादव समाज देश हित में बलिदान और शौर्य में सर्वोपरि रहा है: स्वतंत्रता के बाद अहीर/यादव समाज ने निम्न युद्धों में अति महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:

आजादी के बाद पहली लड़ाई 1947 में चार कुमाऊं रेजिमेंट की अहीर कंपनी ने मेजर सोमनाथ शर्मा के नेतृत्व में लड़ी। अहीरों की वीरता के कारण मेजर सोमनाथ शर्मा को देश का पहला “परमवीर चक्र” प्रदान किया गया। दूसरी लड़ाई 1962 में रेजांगला की लड़ाई लड़ी गई यह लड़ाई 13 कुमाऊं  की अहीर कंपनी ने मेजर शैतान सिंह के नेतृत्व में लड़ी। यह लड़ाई संसार की सर्वोत्तम लड़ाइयों में से एक हैं। अहीरो के शौर्य और बलिदान के कारण मेजर शैतान सिंह को “परमवीर चक्र”  से नवाजा गया। तीसरी लड़ाई 1965 में अहीरों की तोपखाना बैटरी की वजह से हाजीपीर पर कब्जा हो पाया। चौथी लड़ाई कारगिल की 1999 में लड़ी गई जिसमें योगेंद्र यादव को शांतिकाल का सबसे बड़ा वीरता पुरस्कार “अशोक चक्र” से नवाजा गया।आतंकवादियों एवं नक्सलियों के खिलाफ शायद ही कोई ऑपरेशन ऐसा रहा होगा जिसमें अहीर सैनिकों का बलिदान ना रहा हो। अर्धसैनिक बलों में भी अहीरों का योगदान अद्वितीय रहा है।

उन्होने राष्ट्रहित की बात करते हुए कहा की  संविधान में निहित समानता के हित में तथा उपरोक्त तथ्यों का अवलोकन करने से तार्किक  तरह से सिद्ध होता है कि कहीं ना कहीं अहीर/यादव समाज की अनदेखी भारतीय सेना में आजादी के बाद से आज तक जारी है इसलिए भारतीय सेना में अहीर/यादव रेजिमेंट का गठन अपरिहार्य एवं सामाजिक न्याय के संवैधानिक  अधिकार के तहत जरूरी है।

11 बजे शुरू होगा प्रदर्शन ‘

सतीश खोला ने बताया की यात्रा आज रात्रि प्रवास रेवाड़ी व कल रात्रि प्रवास गुरुग्राम में करेगी 19 जून को प्रातः 11 बजे से रामलीला मैदान दिल्ली में धरना प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देंगे।

सतीश खोला ने बताया की यादव समाज महेन्दरगढ़ के प्रधान डॉ प्रेमराज यादव, समाज गुरुग्राम के प्रधान प्रवीण यादव व यादव समाज रेवाड़ी के प्रधान रामबीर यादव ने समाज के लिए सामूहिक फैसला लिया की आज के बाद समाज में सभी शुभ कार्यो के शुभारंभ पर अहीर रेजीमेंट के संघर्ष के लिए शगुन निकाला जायेगा।

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