“अल्पसंख्यक” की नई परिभाषा तय करने को सुप्रीम कोर्ट ने दिए ये निर्देश

नई दिल्ली। अल्पसंख्यक की परिभाषा और अल्पसंख्यकों की पहचान के दिशा निर्देश तय करने की मांग का मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक आयोग को निर्देश दिया है कि तीन महीने के अंदर वो अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे । बीजेपी नेता अश्वनी कुमार उपाध्याय ने जनहित याचिका दाखिल कर सिर्फ वास्तव में अल्पसंख्यकों को ‘अल्पसंख्यक संरक्षण’ दिये जाने की मांग की है।

ये भी पढ़ें :-राफेल मामले में कांग्रेस का CAG पर निशाना, आज संसद में घमासान के आसार 

आपको बता दें उपाध्याय ने अपनी याचिका में कहा था कि राष्ट्रव्यापी जनसंख्या आंकड़ों की बजाय राज्य में एक समुदाय की जनसंख्या के संदर्भ में अल्पसंख्यक शब्द को पुन:परिभाषित करने और उस पर पुन:विचार किए जाने की आवश्यकता है। याचिका में कहा गया था कि हिंदू जो राष्ट्रव्यापी आकंड़ों के अनुसार एक बहुसंख्यक समुदाय है वह पूर्वोत्तर के कई राज्यों और जम्मू-कश्मीर में अल्पसंख्यक है।

ये भी पढ़ें :-Priyanka Gandhi Road Show पर कांग्रेसी जोश में, भाजपा ने कहा चोर शो 

जानकारी के मुताबिक तीसरी मांग में कहा कि केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि वह अल्पसंख्यक की परिभाषा तय करे और अल्पसंख्यकों की पहचान के लिए दिशानिर्देश बनाए। ताकि यह सुनिश्चित हो कि सिर्फ उन्हीं अल्पसंख्यकों को संविधान के अनुच्छेद 29-30 में अधिकार और संरक्षण मिले जो वास्तव में धार्मिक और भाषाई, सामाजिक, आर्थिक और राजनैतिक रूप से प्रभावशाली न हों और जो संख्या में बहुत कम हों।

Loading...
loading...

You may also like

आज का राशि फल

मेष:- कोई हितैषी बिगड़े हुए संबंधों में सुधार