नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश और राजस्थान के सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स और सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के बिना अनुमति प्रवेश तथा फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, इंटरव्यू, ऑडियो रिकॉर्डिंग और लाइवस्ट्रीमिंग पर रोक लगाने वाले आदेशों को चुनौती देने वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत इस मामले की सुनवाई करने की इच्छुक नहीं है। यह याचिका वकील नरेंद्र मिश्रा की ओर से दायर की गई थी।
मामला उस समय चर्चा में आया जब ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सोशल मीडिया पर सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं से जुड़े कई वीडियो सामने आए। कुछ मामलों में बिना अनुमति स्कूल परिसरों में प्रवेश कर शिक्षकों और कर्मचारियों से पूछताछ करने की घटनाएं भी सामने आई थीं।
याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि स्कूलों की स्वतंत्र रूप से स्थिति रिकॉर्ड करने पर शौचालय, पेयजल, मिड-डे मील और बुनियादी ढांचे जैसी कमियां सामने आती हैं। याचिका में इन प्रतिबंधों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-A के तहत मिले अधिकारों के खिलाफ बताया गया था।
राजस्थान ने 16 अगस्त 2026 और उत्तर प्रदेश ने 19 अगस्त 2026 को जारी आदेशों के जरिए बिना पूर्व अनुमति स्कूल परिसरों में प्रवेश, फोटोग्राफी, इंटरव्यू और लाइवस्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई थी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बाद फिलहाल दोनों राज्यों में सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और रिकॉर्डिंग के लिए पूर्व अनुमति की व्यवस्था लागू रहेगी।
