दागी नेता चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

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नई दिल्ली। देश में दागी नेता चुनाव लड़ सकते हैं या नहीं इस पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को संसद के ऊपर छोड़ दिया है। अब संसद यह फैसला करेगी कि आपराधिक मामलों में आरोपी प्रत्याशी को चुनाव लड़ने दिया जाएगा या नहीं। बता दें कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 28 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था। जिसपर मंगलवार को फैसला आना तय था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है कि दागी नेता अपने आपराधिक मामले को बोल्ड अक्षर में लिखेंगे।

दागी नेता को अपने आपराधिक मामलों को करना होगा साझा

इसके लिए सुप्रीम कोर्ट ने जेल सुधार पर उपायों की सिफारिश करने के लिए पूर्व अनुसूचित जाति न्यायाधीश अमिताव रॉय की अध्यक्षता में जेल सुधार पर तीन सदस्यीय समिति का गठन किया। समिति को सरकारी अधिकारियों द्वारा सहायता दी जाएगी और समय-समय पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रिपोर्ट दर्ज करेगी। सुप्रीम कोर्ट आज उन याचिकाओं पर अपना फैसला सुना सकता है जिसमें सवाल उठाया गया है कि आपराधिक सुनवाई का सामना कर रहे किसी सांसद या विधायक पर उनके खिलाफ आरोप तय होने पर चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराया जा सकता है या नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रत्याशी अपने आपराधिक मामले की जानकारी पार्टी अध्यक्ष को देगा।

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MP, MLA और MLC कोर्ट में प्रैक्टिस कर सकेंगे

सासंदों और विधायकों द्वारा कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस करने के खिलाफ याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है। MP, MLA और MLC कोर्ट में बतौर वकील प्रैक्टिस कर सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने अपना फैसला सुनाया। कहा कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। MP या MLA फुल टाइम एंप्लाई नहीं हैं। गौरतलब है कि इस वक्त कपिल सिब्बल, पी चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी, केटीएस तुलसी, विवेक तन्का, के परासरन आदि कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहे हैं। दरअसल बीजेपी नेता अश्वनी उपाधयाय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सासंदों, विधायकों को बतौर वक़ील कोर्ट में प्रैक्टिस करने से रोक की मांग की थी।

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