टैक्सी ड्राईविंग छोड़ बना पुलिस का मुखबिर, अब जम्मू-कश्मीर में बढ़ा रहा है JEM का नेटवर्क

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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रहे एनकाउंटर के बाद भी आतंकियों की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही है। इस बढ़ते आतंकी नेटवर्क पर रोक लगाने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस और सुरक्षाबल लगातार प्रयासरत हैं। इसी बीच एक ऐसी खबर आई जिसने सभी को हैरान कर दिया। जम्मू-कश्मीर में पांच साल पहले तक एक मामूली टैक्सी ड्राइवर अब जम्मू कश्मीर में आतंक का चेहरा बन चुका है। टैक्सी ड्राईवर आशिक नेंगरू पहले पुलिस व सुरक्षाबलों का मुखबिर रहा है अबी घाटी ही नहीं पूरे जम्मू कश्मीर में जैश के आतंकी नेटवर्क को खड़ा करने में जुटा था। आशिक पर पुलिसकर्मी की हत्या में शामिल होने का आरोप भी था, लेकिन वह बच गया था। सुरक्षाबलों को इसकी खबर तब लगी जब पिछले साल सितंबर में झज्जर कोटली में मुठभेड़ में तीन आतंकी मारे गए। इस मुठभेड़ में उसका भाई भी पकड़ा गया था। उसके बाद आशिक के खौफनाक चेहरा सभी के सामने आया।

जानकारी के अनुसार, आशिक अहमद नेंगरु का भाई अब्बास जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी था और वह स्वयं टैक्सी चलाता था। आशिक पर पुलिसकर्मी की हत्या में का आरोप भी लगा, लेकिन वह बच गया। भाई की मौत के बाद वह खुद को पूरी तरह आतंकवाद से दूरी बनाने का दिखावा करते हुए पुलिस को राष्ट्रविरोधी तत्वों की तथाकथित जानकारी भी देने लगा। और इस तरह कुछ ही समय में पुलिस और सेना का एक प्रभावशाली मुखबिर बन गया।

आशिक अहमद नेंगरु दक्षिण कश्मीर में सक्रिय आतंकियों से लेकर गुलाम कश्मीर तक में बैठे उनके सरगनाओं की पूरी खबर रखता था।पुलवामा जिले में काकपोरा इलाके के रहने वाला आशिक हुसैन नेंगरु ने खुद को संदेह से बचाने के लिए हिज्ब और जैश के आकाओं के कहने पर तथाकथित तौर पर दो से तीन आतंकियों को मुठभेड़ में भी मरवाया। सितंबर 2018 में झज्जर कोटली में हुई मुठभेड़ के बाद वह जैश के मोस्टवांटेड आतंकियों की सूची का हिस्सा बन गया।

सुरक्षाबल उसे लगातार तलाशते रहे और वह मौका पाकर गुलाम कश्मीर भाग गया। हालांकि उसका भाई रियाज पकड़ा गया था। रियाज ही वह ट्रक चला रहा था जिसमे आतंकी छिपे हुए थे। सुरक्षाबलों को लगा कि आशिक पाकिस्तान भाग गया, लेकिन उनका यह अनुमान गलत निकला। नेंगरू गुलाम कश्मीर जाने के बाद और ज्यादा खतरनाक साबित हुआ।

सूत्रों के अनुसार, हुर्रियत के एक वरिष्ठ नेता के अलावा हिजबुल के एक कमांडर के साथ भी उसके घनिष्ठ संबंध थे। उनके कहने पर वर्ष 2016 में पुलवामा और उसके साथ सटे इलाकों में पत्थरबाजी में अहम रोल अदा किया। वह पत्थरबाजों तक पैसे पहुंचाने से लेकर पत्थरबाजी के लिए इलाके भी चुनता था। इस दौरान उसने खुद भी खूब पैसा बनाया और सूमो छोड़ ट्रकों का मालिक बन गया। इन ट्रकों का उसने आतंकियों व हथियारों को सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचाने के लिए बखूबी इस्तेमाल किया।

सितंबर माह पंजाब से हथियारों की खेप ला रहे जैश ए मोहम्मद के तीन स्थानीय आतंकियों को जब लखनपुर में पुलिस ने पकड़ा तो एक बार फिर नेंगरू का नाम सामने आया। पता चला कि वह गुलाम कश्मीर से अब अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। करीब दस दिन पहले उसका एक और करीबी रिश्तेदार इम्तियाज जम्मू के निकट बाड़ी ब्राह्मणा में पकड़ा गया। वह नेंगरु के कहने पर जम्मू में जैश का माडयूल तैयार कर रहा था।

आशिक पाकिस्तान में बैठे खालिस्तानी आतंकियों के साथ मिलकर पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए हथियार पहुंचा रहा है। यह हथियार पंजाब में सक्रिय राष्ट्रविरोधी तत्व उठाते हैं और फिर कश्मीरी आतंकियों को पहुंचा देते हैं।

जम्मू कश्मीर में पकड़े गए नेंगरु के साथियों की मानें तो बीते साल झज्जर कोटली में मुठभेड़ तक वह करीब 27 पाकिस्तानी आतंकियों को जम्मू से सुरक्षित कश्मीर पहुंचा चुका था। इस दौरान उसने तथाकथित तौर पर एक दर्जन बार हथियारों का जखीरा भी पहुंचाया। सुजवां और नगरोटा स्थित सैन्य प्रतिष्ठानों पर हमले में लिप्त जैश के आत्मघाती आतंकियों को उनके टारगेट तक पहुंचाने में उसकी अहम भूमिका रही है।

गुलाम कश्मीर पहुंचने के बाद भी उसने करीब एक दर्जन विदेशी आतंकियों को जम्मू और पंजाब के रास्ते ट्रकों के जरिए कश्मीर पहुंचाया है। तस्करों व ओजीडब्ल्यू से संपर्क मेंनेंगरू से जुड़े मामलों की जांच कर रहे एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक वह जम्मू प्रांत के सीमावर्ती इलाकों की जानकारी भी रखता है। वह पंजाब और दिल्ली में बैठे कई तस्करों को भी अच्छी तरह जानता है।

इसके अलावा वह पांच अगस्त तक बडगाम में बैठे आतंकियों के ओवग्राउंड वर्कर नेटवर्क के साथ लगातार संपर्क में रहा है। इसलिए वह जैश और पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए इस समय बहुत अहम है। यही कारण है कि इस समय पंजाब से लेकर कश्मीर तक हथियारों की तस्करी और आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए एक कुख्यात चेहरा बन चुका है।

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