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टेलीग्राम पर लगा अस्थायी बैन खत्म, 30 जून तक नहीं मिलेगा यह फीचर

Telegram

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भारत में कुछ यूज़र्स के लिए मैसेजिंग एप्लिकेशन टेलीग्राम (Telegram) की सेवाएं दोबारा शुरू हो गई हैं। ऐप पर लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध 22 जून, 2026 को समाप्त हो गया, जिसके बाद यह एंड्रॉयड यूज़र्स के लिए गूगल प्ले स्टोर (Google Play Store) पर वापस आ गया है। हालांकि, 23 जून की सुबह तक यह ऐपल के ऐप स्टोर (Apple App Store) पर उपलब्ध नहीं था, लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार द्वारा प्रतिबंध को आगे न बढ़ाने के फैसले के बाद आज से पूरे देश में यह दोनों प्लेटफॉर्म्स पर पूरी तरह काम करने लगेगा। इस राहत के बीच, टेलीग्राम का एक महत्वपूर्ण फीचर ‘मैसेज-एडिटिंग’ 30 जून तक ब्लॉक रहेगा।

क्यों लगाया गया था टेलीग्राम पर बैन?

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की सिफारिशों पर कार्रवाई करते हुए 22 जून, 2026 तक टेलीग्राम के एक्सेस पर रोक लगा दी थी। यह कदम 21 जून को आयोजित होने वाली NEET (UG) 2026 की री-एग्जाम (पुनः परीक्षा) की शुचिता और पब्लिक ऑर्डर को बनाए रखने के लिए उठाया गया था।

NTA के अनुसार, परीक्षाओं के दौरान चीटिंग रैकेट चलाने वाले लोग उम्मीदवारों को ठगने और भ्रम फैलाने के लिए इस प्लेटफॉर्म का संगठित रूप से गलत इस्तेमाल कर रहे थे। जांच में सामने आया कि टेलीग्राम के ‘मैसेज-एडिटिंग’ फीचर का उपयोग करके कथित ‘पेपर लीक’ के फर्जी सबूत तैयार किए जा रहे थे।

जालसाज परीक्षा खत्म होने के बाद पुराने मैसेज को एडिट करके उसमें प्रश्नपत्र अपलोड कर देते थे, जिससे उसका ओरिजिनल टाइमस्टैम्प (पुरानी तारीख और समय) वैसा ही रहता था और ऐसा प्रतीत होता था कि पेपर परीक्षा से पहले ही लीक हो गया था। इसी वजह से मंत्रालय ने 30 जून तक इस फीचर को बंद रखने का अलग से आदेश जारी किया था।

सीईओ पावेल डुरोव का विरोध और दिल्ली हाई कोर्ट का रुख

इस अस्थायी प्रतिबंध पर टेलीग्राम (Telegram) के सीईओ और को-फाउंडर पावेल डुरोव ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने दलील दी कि इस फैसले के कारण भारत के 150 मिलियन (15 करोड़) से अधिक आम टेलीग्राम यूज़र्स को बिना वजह परेशानी झेलनी पड़ी, जबकि पेपर लीक के असली जिम्मेदार लोग इस दौरान दूसरे प्लेटफॉर्म्स पर शिफ्ट हो गए। टेलीग्राम ने इस बैन के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया था।

हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के इस फैसले को सही ठहराया। टेलीग्राम (Telegram FZ LLC) की याचिका को खारिज करते हुए जस्टिस तेजस करिया की सिंगल-जज बेंच ने कहा कि देश भर में आयोजित होने वाली इतनी बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) की संवेदनशीलता को देखते हुए 22 जून तक प्लेटफॉर्म को रोकना और 30 जून तक एडिटिंग फीचर को बंद करना पूरी तरह तार्किक और सही कदम था। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि सरकार का यह आदेश ‘सबसे कम प्रतिबंधात्मक’ (least restrictive) था और इमरजेंसी ब्लॉकिंग पावर का इस्तेमाल करते समय कानून के तहत तय प्रक्रियाओं का सख्ती से पालन किया गया था।

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