वर्चुअल करंसी पर अंतर मंत्रालय समिति ने सरकार को रिपोर्ट सौंपी

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  • क्रिप्टोकरंसी से जुड़ी गतिविधियों में लिप्त पाए जाने पर जुर्माने का प्रस्ताव
  • देश में क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध के लिए फिलहाल अलग से कोई कानून नहीं

नई दिल्ली। क्रिप्टोकरंसी पर अंतर मंत्रालय (इंटर मिनिस्ट्रियल) समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी। कमेटी ने प्राइवेट क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध लगाने और इससे जुड़ी गतिविधियों में शामिल लोगों पर जुर्माना लगाने की सिफारिश की। हालांकि, यह प्रस्ताव भी दिया कि सरकार आधिकारिक डिजिटल करंसी के बारे में विचार कर सकती है। न्यूज एजेंसी ने सोमवार को यह जानकारी दी। सरकार आखिरी फैसला लेने से पहले संबंधित विभागों और रेग्युलेटर्स से मशविरा करेगी।

नवंबर 2017 में बनी थी समिति

समिति ने कहा है कि वर्चुअल करंसी और इससे जुड़ी खास तकनीक अभी डेवलप हो रही है। सरकार को जरूरत लगे तो रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए स्टैंडिंग कमेटी बनाई जा सकती है। सरकार ने 2 नवंबर 2017 को इस अंतर मंत्रालय समिति का गठन किया था। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के चेयरमैन की अध्यक्षता में गठित समिति में सेबी के चेयरमैन, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर भी शामिल हैं।

क्रिप्टोकरंसी के जोखिमों पर सरकार एडवाइजरी जारी करती है

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने शुक्रवार को संसद में एक सवाल के जवाब में कहा था कि देश में क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध के लिए अलग से कोई कानून नहीं बना है। लेकिन, आरबीआई, आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय जैसी एजेंसियां क्रिप्टोकरंसी के मामले में मौजूदा कानूनों के मुताबिक कार्रवाई करती हैं। ठाकुर ने कहा था कि क्रिप्टोकरंसी के जोखिमों को देखते हुए सरकार और आरबीआई एडवाइजरी जारी करते रहते हैं।

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