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भारतीय रिजर्व बैंक के फैसले से जमा पर लग सकता है झटका

नई दिल्ली| भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कोरोना संकट की इस घड़ी में कर्ज सस्ता करने के लिए एक बार फिर से रेपो रेट में 40 आधार अंकों की कटौती की है। आरबीआई ने रेपो रेट 4.4 फीसदी से घटाकर चार फीसदी कर दिया है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस फैसले से कर्ज लेना तो सस्ता होगा, लेकिन जमा योजनाओं पर मिलने वाला रिटर्न कम हो सकता है। बैंक आम लोगों को कर्ज सस्ता देने के लिए एफडी पर ब्याज घटाएंगे। इससे एफडी करने वाले निवेशकों का रिटर्न घटेगा।

मिलने वाला रिटर्न कम होगा

सेबी रजिस्टर्ड फाइनेंशियल प्लानर जितेंद्र सोलंकी ने बताया कि एफडी पर मिलने वाला रिटर्न काफी कम हो गया है। इसके चलते इस पर महंगाई के मुकाबले मिलने वाला रिटर्न नकारात्मक है। ऐसे में निवेशकों के पास पीपीएफ, सुकन्या समृद्धि, एसआईपी के जरिये म्यूचुअल फंड और ईएलएस बेहतर विकल्प हैं। इसमें निवेशक अपने लक्ष्य के अनुसार निवेश कर सकते हैं। लंबी अवधि में इनमें किसी भी निवेश पर बहुत जोखिम नहीं है और निवेशकों को उनके निवेश पर एफडी के मुकाबले काफी अच्छा रिटर्न मिल सकता है।

भारत में करोड़ों वरिष्ठ नागरिक फिक्स्ड डिपॉजिट ( एफडी ) से प्राप्त ब्याज की रकम पर निर्भर हैं। बैंकों ने एफडी पर दी जा रही ब्याज दरों में कटौती की गई है। इससे उनके आया पर बुरा असर पड़ा है। एसबीआई ने वरिष्ठ नागरिकों को पांच साल या उससे ज्यादा समय पर जमा करने पर 30 आधार अंकों का अतिरिक्त प्रीमियम ब्याज देने का ऐलान किया है।

पर्सनल फाइनेंस विशेषज्ञों का कहना है कि आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कटौती से बैंक सवधि जमा की दरों पर ब्याज आने वाले समय में घटाएंगे। मार्च में आरबीआई ने रेपो रेट घटाया था तो स्टेट बैंक ने एफडी के ब्याज दर में 0.50% की कटौती की थी। आने वाले दिनों में अधिकांश बैंक एफडी पर ब्याज दर 0.25 से 0.50% तक घटा सकते हैं।

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