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शाही युग का अंत: कामसुंदरी देवी का निधन, पूरे बिहार में शोक की लहर

Queen Kamsundari Devi has passed away.

Queen Kamsundari Devi has passed away.

बिहार के दरभंगा राजघराने की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी (Kamsundari Devi) का सोमवार को निधन हो गया। वह लगभग 94 वर्ष की थीं और पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं। महारानी ने दरभंगा के राज परिसर स्थित कल्याणी निवास में अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरे मिथिला क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।

बता दें कि महारानी कामसुंदरी देवी (Kamsundari Devi) , महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी और अंतिम पत्नी थीं। जानकारों का कहना है कि महारानी का जीवन एक युग की समाप्ति का प्रतीक है, जिसमें राजसी वैभव से लेकर आधुनिक संघर्ष और चुनौतियों तक की कहानी छिपी है।

ब्रेन हेमरेज के बाद बिगड़ी थी सेहत

पिछले कुछ महीनों से महारानी (Kamsundari Devi) की तबीयत लगातार खराब चल रही थी। सितंबर 2025 में वह बाथरूम में फिसलकर गिर गई थीं, जिससे उन्हें ब्रेन हेमरेज हुआ और मस्तिष्क में खून के थक्के जम गए थे। उस समय उन्हें दरभंगा के एक निजी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनकी स्थिति गंभीर लेकिन नियंत्रण में बताई थी। उनके पोते युवराज कपिलेश्वर सिंह सहित परिवार के अन्य सदस्य उनकी सेवा में जुटे थे। हालांकि, उनकी सेहत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ और अंततः उन्होंने कल्याणी निवास पर ही दम तोड़ दिया।

महाराजा कामेश्वर सिंह की स्मृति को रखा जीवित

महारानी कामसुंदरी देवी (Kamsundari Devi) का जन्म 1930 के दशक में हुआ था। उनका विवाह 1940 के दशक में महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंह से हुआ। महाराजा कामेश्वर सिंह दरभंगा रियासत के अंतिम शासक थे, जिनका निधन 1962 में हुआ था। उनकी पहली पत्नी महारानी राजलक्ष्मी का निधन 1976 में और दूसरी पत्नी महारानी कामेश्वरी प्रिया का निधन 1940 में हो चुका था।

महारानी कामसुंदरी देवी ने अपने पति की स्मृति में ‘महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। यह संस्था मिथिला की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने का कार्य करती है। इस फाउंडेशन के माध्यम से उन्होंने महाराजा की निजी लाइब्रेरी को जनता के लिए उपलब्ध कराया, जिसमें 15,000 से अधिक दुर्लभ किताबें और पांडुलिपियां संकलित हैं।

महारानी कामसुंदरी देवी (Kamsundari Devi) दरभंगा राज की अंतिम कड़ी थीं। महाराजा कामेश्वर सिंह की मृत्यु के बाद उन्होंने संपत्ति और ट्रस्ट से जुड़े कई जटिल कानूनी विवादों का सामना किया। साल 2025 में ही दरभंगा ट्रस्ट के 47 साल पुराने विवाद का निपटारा हुआ था, जिसमें अदालत ने फैसला दिया कि महारानी के बाद राजेश्वर सिंह और कपिलेश्वर सिंह ट्रस्टी बनेंगे।

महारानी ने मिथिला की परंपराओं, शिक्षा, संस्कृति और कला को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यद्यपि समय के साथ राजघराने की संपत्ति में गिरावट आई, लेकिन महारानी की सादगी और समर्पण ने हमेशा लोगों का दिल जीता।

बिहार के दिग्गजों ने जताया शोक

महारानी (Kamsundari Devi) के निधन की खबर मिलते ही बिहार के कई राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने गहरा शोक व्यक्त किया है। युवराज कपिलेश्वर सिंह ने कहा कि महारानी का जाना परिवार और मिथिला के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

उनके पौत्र रत्नेश्वर सिंह ने बताया कि महारानी का अंतिम संस्कार राज परिसर स्थित माधेश्वर परिसर (श्यामा माई मंदिर प्रांगण) में पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ किया जाएगा। मुखाग्नि उनके पौत्र कुमार रत्नेश्वर सिंह देंगे। वर्तमान में उनके पार्थिव शरीर के अंतिम दर्शन के लिए कल्याणी निवास पर भारी संख्या में दरभंगा वासी और राजघराने के शुभचिंतक पहुंच रहे हैं।

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