देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 1947 में देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों को नमन किया। उन्होंने कहा कि देश के विभाजन का दर्द कभी भुलाया नहीं जा सकता। विभाजन को इतिहास का एक काला अध्याय बताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि लाखों लोगों ने अपनी जान गंवाई और बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन का दर्द झेलना पड़ा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को जब देश आजादी का जश्न मना रहा था, उसी समय विभाजन की त्रासदी का दर्द भी देशवासियों को सहना पड़ा। भारत के लिए यह घटना किसी बड़ी विभीषिका से कम नहीं थी। विभाजन के दौरान बड़ी संख्या में लोगों को अपना घर-बार छोड़कर विस्थापित होना पड़ा और असंख्य परिवार अपनों से बिछड़ गए।
2021 से मनाया जा रहा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस त्रासदी की पीड़ा और उससे जुड़े संघर्षों को स्मरण करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2021 में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय लिया। तब से हर वर्ष यह दिवस विभाजन के दौरान पीड़ित परिवारों, विस्थापित लोगों और जान गंवाने वाले नागरिकों की स्मृति को समर्पित किया जाता है।
उन्होंने कहा कि यह दिवस हमें उन लोगों के संघर्ष, पीड़ा और बलिदान की याद दिलाता है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया और विभाजन की भयावह परिस्थितियों का सामना किया।
सामाजिक एकता और सद्भाव का संकल्प लेने का अवसर
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देश के विभाजन ने सामाजिक एकता, सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं को गहरी चोट पहुंचाई। इसलिए यह आवश्यक है कि विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में न देखा जाए, बल्कि उससे सीख लेते हुए सामाजिक एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत किया जाए।
उन्होंने कहा कि यह देशवासियों का कर्तव्य है कि स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाले और विभाजन की यातनाएं झेलने वाले भारत माता के प्रत्येक सपूत के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करें।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भावी पीढ़ी को इतिहास की उस त्रासदी से परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इतिहास की पीड़ा को याद रखना इसलिए जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां सामाजिक एकता, सद्भाव और राष्ट्र की अखंडता के महत्व को समझ सकें।
