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फोन की घंटी बजी और नोबेल पुरस्कार जीतने की ख़बर थी फिर भी सो गये अभिजीत बनर्जी

नई दिल्ली। अर्थशास्त्र के क्षेत्र में नोबेल जीतने वाले अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने जब एक इंटरव्यू में बताया कि उनके लिए नींद से बढ़कर कुछ नहीं है तो सब लोग हैरान रह गये। www.nobelprize.org को दिए इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया कि स्टॉकहोम से जब उन्हें फोन आया तो वह गहरी नींद में थे।

अभिजीत ने बताया कि वह आमतौर सुबह जल्दी उठने के आदी नहीं हैं, मगर सूचना मिलने के बाद उनकी नींद खुल गई। उन्होंने कहा कि नींद पूरी न होने से उनके लिए दिनभर समस्या हो जाती है, इसलिए उन्होंने दोबारा सोने की कोशिश की। बधाई देने के लिए आने वाले फोन की घंटियों के बीच भी वह महज 40 मिनट और सो गए। उनको बधाई देने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी थे जिन्होंने ट्वीट कर उन्हें शुभकामनाएं दी।


अर्थशास्त्र के क्षेत्र में बहुमूल्य योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय मूल के अर्थशास्त्री अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था डांवाडोल है। नोबेल जीतने के बाद बनर्जी ने भारत को लेकर यह पहली प्रतिक्रिया दी है।

बनर्जी ने कहा कि मौजूद समय में उपलब्ध आंकड़े यह भरोसा नहीं जगाते हैं कि देश की आर्थिक स्थिति में जल्द कोई सुधार होगा। उन्होंने कहा, “भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति अस्थिर है। मौजूदा (विकास) के आंकड़ों को देखने के बाद, इसके बारे में निश्चित नहीं हूं (निकट भविष्य में अर्थव्यवस्था का पुनरुद्धार)।

58 वर्षीय बनर्जी ने प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार मिलने पर अपनी खुशी का इजहार करते हुए कहा कि उन्होंने सोचा नहीं था कि करियर में इतनी जल्दी उन्हें यह सम्मान मिल जाएगा। अमेरिका में मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी में इकनॉमिक्स पढ़ाने वाले अभिजीत बनर्जी ने कहा, “मैं पिछले 20 सालों से यह रिसर्च कर रहा हूं। हमने गरीबी कम करने के लिए समाधान देने की कोशिश की है।”

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