चमकी बुखार के बाद अब बिहार में जापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा

जापानी इंसेफेलाइटिस का खतराजापानी इंसेफेलाइटिस का खतरा
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नई दिल्ली। बिहार में चमकी बुखार की वजह से अब तक सैकड़ों बच्चों की मौत हो चुकी है। कहा जा रहा है कि बारिश होने के साथ ही चमकी बुखार का प्रकोप कम हो जाएगा, लेकिन एक और मुसीबत बिहार के लिए मुंह बाये खड़ी है। यह मुसीबत है जापानी इंसेफेलाइटिस। इसका खतरा हर बारिश में बढ़ जाता है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार इसकी वजह से 2011 से अब तक 93 बच्चों की मौत हो चुकी है।

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बारिश के मौसम में हर साल गया और मगध क्षेत्र के जिलों में जेई का प्रकोप बढ़ जाता है और कई बच्चों की मौत हो जाती है। पिछले साल भी इस रोग से 74 बच्चे बीमार हुए थे, जिनमें 11 की मौत हो गयी थी। इस रोग के जानकार बताते हैं कि अमूमन बारिश के महीने में यह रो’ग फैलता है। जुलाई से अक्तूबर तक इसका सर्वाधिक प्रकोप रहता है। गया जापानी इंसेफेलाइटिस मादा क्यूलेक्स मच्छर के काटने से होता है। यह रोग गंदगी की वजह से फैलता है और घोड़ों और सूअर के इलाकों में इसका सर्वाधिक प्रकोप रहता है, क्योंकि यह इनके जरिये फैलता है। मगध के इलाके में महादलित बस्तियों में सूअर पाले जाते हैं, इसलिए इनका प्रकोप अधिक रहता है। इसलिए इस रो’ग को रोकने के लिए साफ-सफाई का सर्वाधिक महत्व है। इसके अलावा सूअर बाड़े से बच्चों को दूर रखना, मच्छरदानी का इस्तेमाल करना जरूरी है।

इस रोग से बचना बेहद जरूरी है क्योंकि बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हालत कितनी खराब है वह चमकी बुखार के रोकथाम के लिए उनके द्वारा की गई व्यवस्था से पता चल गया है।फिलहाल बिहार के सामने इस समस्या से पार पाने की चुनौती होगी।

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