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चंपत राय के समर्थन में आया संत समाज, ट्रस्ट से कहा- इस्तीफा स्वीकार न करें

champat rai

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अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के संभावित इस्तीफे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में जारी तीखी चर्चाओं के बीच अयोध्या का संत मंडल पूरी तरह से उनके समर्थन में लामबंद हो गया है। शनिवार को अयोध्या में आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता (Press Conference) में संतों ने एक सुर में चंपत राय (Champat Rai) का बचाव किया और राम मंदिर ट्रस्ट से पुरजोर अपील की कि उनका इस्तीफा किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए। संतों ने दो टूक कहा कि वे लंबे समय से चंपत राय को करीब से जानते हैं और उनकी निष्ठा, बेदाग ईमानदारी तथा समर्पण से भरी कार्यशैली पर पूरे संत समाज को अटूट विश्वास है।

चंपत राय पूरी तरह निर्दोष, मनगढ़ंत हैं आरोप

अयोध्या संत मंडल ने हाल ही में सामने आए चंदा चोरी के विवाद पर चंपत राय का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वे इस पूरे प्रकरण में पूरी तरह निर्दोष हैं। मीडिया और सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों पर उनके खिलाफ प्रसारित की जा रही सभी बातें पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और तथ्यहीन हैं। संतों ने बिना किसी पुख्ता सबूत के एक सम्मानित और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े वरिष्ठ व्यक्तित्व की छवि को सार्वजनिक रूप से धूमिल करने के प्रयासों की कड़े शब्दों में निंदा की।

स्वयं एसआईटी जांच की मांग करना पारदर्शिता का प्रमाण

संतों ने रेखांकित किया कि इस विवाद के सामने आते ही चंपत राय (Champat Rai) ने स्वयं आगे बढ़कर पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच कराने का लिखित अनुरोध किया था, जो उनकी व्यक्तिगत पारदर्शिता, ईमानदारी और न्यायप्रियता का सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण है। संत समाज ने उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल एसआईटी का गठन किए जाने के फैसले को भी एक बेहद सराहनीय और स्वागत योग्य कदम बताया। संतों ने कहा कि लगातार लग रहे आरोपों और तीखी बयानबाजी के बावजूद चंपत राय ने जिस प्रकार का मानसिक संयम बनाए रखा है और सार्वजनिक रूप से कोई भी विवादित प्रतिक्रिया नहीं दी, वह उनकी महानता को दर्शाता है। अयोध्या के सभी प्रमुख संतों का पूर्ण आशीर्वाद और समर्थन उनके साथ है।

कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि और ट्रस्ट से पूछे तीखे सवाल

चंपत राय का समर्थन करने के साथ ही संत मंडल ने राम मंदिर ट्रस्ट के आंतरिक प्रबंधन और अन्य पदाधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। संतों ने सीधे तौर पर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष (Treasurer) स्वामी गोविंद देवगिरि महाराज को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा रामलला के पावन दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किए जाने वाले महाकोष (दान राशि) की सुरक्षा को लेकर ट्रस्ट और कोषाध्यक्ष के स्तर पर पहले से ही पर्याप्त और कड़े इंतजाम क्यों नहीं किए गए?

आगामी 11 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक को अचानक पूर्व निर्धारित समय से पहले (प्रीपोन) क्यों आयोजित किया गया और इस जल्दबाजी के पीछे आखिर क्या गुप्त कारण था?

अयोध्या के संतों ने इन दोनों गंभीर विषयों पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से अविलंब और स्पष्ट जवाब देने की मांग की है, ताकि राम भक्तों के मन में पैदा हुआ असमंजस दूर हो सके।

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