लखनऊ। उत्तर प्रदेश में वर्ष 2017 के बाद पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के लिए चलाए गए विभिन्न अभियानों के परिणामस्वरूप हरित क्षेत्रफल में 3.38 लाख एकड़ की वृद्धि हुई है। राज्य सरकार के अनुसार, इस अवधि में प्रदेश में 242 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने हिन्दुस्थान समाचार से विशेष बातचीत में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि सरकार के प्रयासों के साथ प्रदेशवासियों की व्यापक जनभागीदारी का परिणाम है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर चलाए गए ‘एक पेड़ मां के नाम’ और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘एक पेड़ लगाओ-पेड़ बचाओ’ अभियान को प्रदेश में व्यापक जनसमर्थन मिला। किसानों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने बड़ी संख्या में पौधे लगाए और उनके संरक्षण में भी भागीदारी की। उन्होंने कहा कि जनसहभागिता के कारण प्रदेश के हरित क्षेत्रफल में हुई वृद्धि अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार ने पिछले नौ वर्षों के दौरान पौधारोपण अभियान को लगातार विस्तार दिया है। कोविड-19 जैसी चुनौती के दौरान भी अभियान प्रभावित नहीं हुआ। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में करीब 5.5 करोड़ पौधों से शुरू हुआ अभियान लगातार आगे बढ़ा।
वर्ष 2018 में 11.27 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। वर्ष 2019 में ‘वृक्षारोपण महाकुंभ’ के तहत 22.59 करोड़ से अधिक पौधों का रोपण किया गया। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के बीच भी 25.87 करोड़ पौधे लगाए गए। वर्ष 2021 में 30 करोड़ से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य पूरा किया गया, जबकि वर्ष 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 35.49 करोड़ हो गया।
वर्ष 2023 में प्रदेश में 30.21 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में 36.50 करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य के मुकाबले रिकॉर्ड पौधारोपण किया गया और संचयी आंकड़ा 168 करोड़ के पार पहुंच गया। इसके बाद वर्ष 2025-26 में ‘वृक्षारोपण महायज्ञ’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत जुलाई 2026 में एक ही दिन में 35.27 करोड़ से अधिक पौधे लगाए गए। सरकार के अनुसार, इस अभियान में सर्वाधिक 1.68 करोड़ पौधे एक जिले में लगाए गए।
एक्सप्रेसवे और राजमार्गों के किनारे विकसित हो रही हरित पट्टी
मंत्री ने बताया कि पौधारोपण को जनअभियान का स्वरूप देने के साथ एक्सप्रेसवे और राजमार्गों के किनारे हरित पट्टी विकसित करने के लिए ‘मिशन छाया’ पर भी काम किया जा रहा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड और गंगा एक्सप्रेसवे समेत प्रमुख मार्गों के किनारे छायादार वृक्ष लगाए जा रहे हैं। पंचवटी, हरिशंकरी और औषधीय वाटिकाओं के माध्यम से स्थानीय तथा औषधीय प्रजातियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
वन विभाग ने पौधारोपण की निगरानी के लिए जियो-टैगिंग और डिजिटल मॉनिटरिंग की व्यवस्था लागू की है। इसके माध्यम से पौधारोपण स्थलों और लगाए गए पौधों की स्थिति पर निगरानी रखने का प्रयास किया जा रहा है।
वायु प्रदूषण नियंत्रण पर जोर
प्रदेश सरकार ने वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए विश्व बैंक की सहायता से 2,741 करोड़ रुपये की उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपी-कैंप) लागू की है। इसके तहत प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों की निगरानी और नियंत्रण पर काम किया जा रहा है। सरकार के अनुसार, 700 से अधिक ईंट-भट्टों को कम प्रदूषण वाली जिग-जैग तकनीक में बदलने की दिशा में कार्य चल रहा है।
लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक बसों और थ्री-व्हीलर्स को बढ़ावा देकर परिवहन क्षेत्र से होने वाले प्रदूषण को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
75 छोटी नदियों के पुनरुद्धार का अभियान
जल संरक्षण के तहत प्रदेश की 75 छोटी नदियों और उनकी सहायक नदियों के पुनरुद्धार का अभियान चलाया जा रहा है। मनरेगा और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से नदी क्षेत्रों में विभिन्न कार्य किए जा रहे हैं। बलिया स्थित सुरहा ताल को रामसर स्थल का दर्जा मिलने के बाद आर्द्रभूमि संरक्षण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार ने ‘सुरक्षित जल पुनरुपयोग नीति-2026’ को मंजूरी दी है। इसके तहत वर्ष 2045 तक उपचारित अपशिष्ट जल के शत-प्रतिशत पुन: उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। आगरा और प्रयागराज के लिए कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं। सरकार के अनुसार, एकीकृत जल प्रबंधन के परिणामस्वरूप अत्यधिक दोहन वाले भूजल ब्लॉकों की संख्या 82 से घटकर 44 रह गई है।
बायोप्लास्टिक और ग्रीन स्किल्स पर भी फोकस
पर्यावरण संरक्षण को रोजगार से जोड़ने के लिए बायोप्लास्टिक को बढ़ावा देने के साथ युवाओं को ‘ग्रीन स्किल्स’ का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना के तहत आईआईटी दिल्ली, आईआईटी रुड़की, बीएचयू और एएमयू समेत 15 प्रमुख शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौते किए गए हैं। वेस्ट मैनेजमेंट, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े रोजगार के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार, वर्ष 2017 के बाद प्रदेश का वन एवं वृक्ष आवरण करीब नौ प्रतिशत से बढ़कर 10 प्रतिशत से अधिक हो गया है। डॉ. अरुण कुमार सक्सेना ने कहा कि सरकार का जोर अब केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि पौधों के संरक्षण, वायु गुणवत्ता में सुधार, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और हरित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी है।
