चीयरलीडर्स की दुनिया का काला सच, अश्लीलता भरी नजरों से लेकर सैलरी तक का राज

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नई दिल्ली। आईपीएल के 11वें संस्करण का चेन्नई सुपर किंग्स की जीत के साथ  रविवार को समापन  हो गया हर साल जब भी आईपीएल आता है तो अपने साथ कई रंग लेकर आता है। जैसे विदेशी खिलाड़ियों का देशी  रंग में घुलना, स्टेडियम में क्रिकेट के शोर में चीयरलीडर्स का ग्लैमर मिलना, या फिर घरेलू क्रिकेट खेल रहे खिलाड़ियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का ख्वाब देखना।

 हर साल विदेशों से आईपीएल का हिस्सा बनने आती हैं चीयरलीडर्स

आईपीएल की जो कहानी हम बताने जा रहे हैं वह चकाचौंध की है, जो ग्लैमर में गुम हो जाती है और आप तक पहुंच नहीं पाती। कहानी उन चीयरलीडर्स की जो हर साल विदेशों से आईपीएल का हिस्सा बनने आती हैं। इनके बारे में बात तो सब करते हैं, लेकिन क्या कभी इनको जानने की कोशिश की है? इस साल आठ  टीमों में से छह  टीमों की चीयरलीडर्स विदेशी मूल की रहीं हैं,जबकि चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के चीयरलीडर्स देशी  मूल के रहीं।

जाने कौन हैं ये चीयरलीडर्स ?

दिल्ली डेयरडेविल्स की चार चीयरलीडर्स यूरोप की थीं तो दो ऑस्ट्रेलिया से आई थीं। आईपीएल में ज्यादादातर चीयरलीडर्स यूरोप से आतीं हैं न की रूस से। ऑस्ट्रेलिया से आई कैथरीन ने बताया कि वह पेशे से डांसर हैं और कई देशों में परफॉर्म कर चुकी हैं। हाल ही में वह छह  महीने के लिए मेक्सिको गईं थीं। कैथरीन बताती हैं, ‘तीन साल की उम्र से ही मुझे डांस के लिए जुनून था और यही जुनून मुझे धीरे-धीरे चीयरलीडिंग की प्रोफेशन तक खींच लाया।

चीयरलीडिंग करते-करते चीयरलीडर्स ने तुड़वा ली थी पसलियां

बतातें चलें कि चीयरलीडर्स प्रोफेशन में आने के लिए केवल डांस ही एक मापदंड नहीं है। इंग्लैंड के मैनचेस्टर से आई डेन बैटमेन ने चौंकाने वाला खुलासा किया  है। डेन बैटमन  ने बताया कि मैं 11 साल की थी जब मैंने स्कूल में चीयरलीडिंग करना शुरू किया था। स्कूल में चीयरलीडिंग करने के दौरान एक बार मेरी पसलियां टूट गईं थी। मुझे उस चोट से उबरने में काफ़ी वक्त लग गया था।

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डेन बैटमन बताती हैं कि आईपीएल में सिर्फ डांस होता है, लेकिन विदेशों में चीयरलीडर्स को फॉर्मेंशन्स भी बनानी होती हैं,जिसके लिए शरीर का लचीला होना बेहद जरूरी है। वो कहती हैं कि यह एक स्पोर्ट्स की ही तरह है। हम उनती ही मेहनत और ट्रेनिंग करते हैं जितनी की मैदान पर खेल रहा खिलाड़ी करता है। डेन बताती है कि वो इससे पहले बॉक्सिंग के खेल के लिए भी चीयरलीडिंग कर चुकी हैं।

आईपीएल में विदेशी मूल की चीयरलीडर्स की सैलरी

आईपीएल में विदेशी मूल की चीयरलीडर लगभग 1500-2000 पाउंड यानी लगभग एक लाख 80 हजार रुपए हर महीने का कमाती हैं। यहां ये बताना भी जरूरी है कि यूरोपियन चीयरलीडर्स और किसी और देश से आई चीयरलीडर्स के वेतन में अंतर होता है। दिल्ली डेयरडेविल्स की चीयरलीडर एले ने कहा कि जितनी मेहनत वो करतीं हैं और जिस देश से वो आतीं हैं उस हिसाब से उनकी सैलरी से वह असंतुष्ट है।

दर्शकों की नजरें क्या उन्हें चीरती हैं?

चीयरलीडर्स से जब संवेदनशील मामले पूछा गया कि वह आखिरकार आईपीएल में चीयरलीडिंग करते दौरान कैसा महसूस करतीं हैं। डेन बेटमैन बताती हैं कि भारत में उन्हें आकर बहुत अच्छा लगता है और यहां उन्हें किसी सेलिब्रिटी जैसा महसूस होता है। लोग उनका ऑटोग्राफ मांगने आते हैं। हालांकि दर्शकों को नसीहत देते हुए इंग्लैंड से आईं डेन बेटमैन कहती हैं कि लोगों को ये समझना चाहिए कि हम पोडियम पर डांस करतीं कोई भोग-विलास के लिए बना सामान नहीं हैं। हम लड़कियां हैं जिनका पेशा चीयरलीडिंग है। हमे इंसान की तरह समझा जाए न की कोई हमारे शरीर पर टिप्पणी करे।

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