Review: ठग्स ऑफ हिंदोस्तान ने हिंदोस्तानियों को ही ठगा

- in मनोरंजन
रेटिंग : 2.5

मुंबई।  बॉलीवुड के दो सुपरस्‍टार अमिताभ बच्‍चन और आमिर खान फ‍िल्‍म ठग्‍स ऑफ ह‍िंदोस्‍तान में पहली बार एक साथ स्‍क्रीन पर आए, तो दर्शकों को लगा कि ये कोई नया कीर्त‍िमान रचने का काम करेंगे। अफसोस न कीर्त‍िमान बना और न इतिहास रचा गया। यशराज बैनर तले बनी फ‍िल्‍म ठग्‍स ऑफ ह‍िंदोस्‍तान र‍िलीज हो चुकी है। लंबे समय से दर्शकों को इस फ‍िल्‍म की पहली झलक का इंतजार था जो अब खत्‍म हो गया है।

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यशराज बैनर का दावा था कि यह फ‍िल्‍म इस साल की सबसे बड़ी फिल्मों में से एक और उनके बैनर की मेगाबजट फ‍िल्‍म है। ये फिल्म  फिलिप मीडोज टेलर के साल 1839 में मशहूर हुए नॉवेल कन्फेशन ऑफ ए ठग पर आधारित है। फिल्म सच्‍ची कहानी पर आधार‍ित है। ठग अमीर अली और उसके पिता इस्माइल की कहानी पर यह फ‍िल्‍म बनी है जो जालौन आकर बस गए थे और अंग्रेजी सरकार के लिए दहशत का पर्याय बन गए थे।

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विजय कृष्णा आचार्य द्वारा निर्देश‍ित इस फिल्म को यशराज बैनर 3डी और आईमैक्स में भी रिलीज किया है। इस फ‍िल्‍म में अमिताभ बच्‍चन ठगों के सरदार खुदाबख्श  के रोल में नजर आए हैं। फिल्म में उनका नाम आजाद है। अमिताभ बच्‍चन ने अपने फ‍िल्‍मी कर‍ियर में पहली बार इस तरह का रोल निभाया है ज‍िसमें वह ठग बनकर तलवारबाजी करते नजर आए हैं। अमिताभ का यह अंदाज वाकई प्रभावित करता है। वहीं आमिर खान फ‍िरंगी मल्‍लाह के किरदार में हैं। अमिताभ बच्‍चन और आमिर खान के अलावा कटरीना कैफ और फातिमा सना शेख इस फ‍िल्‍म में लीड रोल में हैं। यह फ‍िल्‍म 5000 स्‍क्रीन्‍स पर रिलीज हुई है।

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यह फिल्म है अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने वाले बागियों की। कहानी है 1795 के रौनकपुर की। मिर्ज़ा (रोनित रॉय) रौनकपुर के राजा हैं जो अंग्रेज़ों की गुलामी को पसंद नहीं करते हैं और उनके साथ उनका पूरा परिवार मार दिया जाता है। परिवार में बचती है तो केवल उनकी बेटी ज़फि‍रा (फातिमा सना शेख) के, जिन्हे खुदाबक्श (अमिताभ बच्‍चन) बचा लेता है। फ‍िर दोनों साथ मिलकर अंग्रेज़ों पर धावा बोलते हैं ठग बनकर।

इस बीच फिरंगी मल्ला जो फितरत से धोकेबाज़ है, एंट्री लेता है और सबको ठगता है। उसकी ठगी के श‍िकार अंग्रेज भी होते हैं। अंग्रेज उसको खुदाबक्श उर्फ़ आज़ाद को पकड़ने का काम देते हैं। एक धोखे के बाद फिरंगी का मन बदलता है, मगर फिल्म में आखिर ऑडियंस धोखा खा जाती है।

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र‍िव्‍यू: अगर आमिर खान फिल्म में हों तो लगता है कि फिल्म में थोड़ा बहुत परफेक्शन जरूर होगा और जब उनके साथ सदी के महानायक अमिताभ बच्चन आएं तो जरूर कुछ बड़ा होने की उम्‍मीद होती है। मगर फिल्म के निर्देशक विजय कृष्णा आचार्य इस फिल्म में अपना सिर्फ टशन ही दिखा पाए। फिल्म की कहानी काफी कमजोर है। कहीं कहीं पर लगेगा कि यह मनोज कुमार की क्लासिक फ‍िल्‍म क्रांति से इंस्पायर्ड है। जहां तक इसके VFX भी बात है तो वो काफी कमजोर है।

एक्‍ट‍िंग: अगर एक्टिंग की बात करें को अमिताभ और आमिर से ज़्यादा मज़ा तो मुहम्मद ज़ीशान अयूब को देखकर आता है, जिन्होंने शनीचर प्रसाद का रोल प्‍ले क‍िया है। फिल्म को देखकर लगता है कि उनके भी काफी सीन्स काटे गये हैं। कटरीना कैफ भी केवल तीन सीन्स और दो गानों में नज़र आती हैं। अमिताभ और आमिर के परफॉर्मेंस दमदार तो है, मगर इससे फिल्म नहीं बनती है। फातिमा सना शेख़ का दंगल के बाद यह काफी न‍िराशाजनक काम है। फ‍िल्‍म देखकर लगता है कि वाकई दर्शकों को ठग्‍स

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