हेल्थ टिप्स: गठिया व कमर दर्द जैसी समस्याओं से निजात पाने के लिए करें ये उपाय

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हेल्थ टिप्स

लखनऊ। हर औरत की एक ख्वाइश होती है कि वो खुद को एक मां के रूप में देखे लेकिन 9 माह का यह समय इतना आसान भी नहीं होता। इस दौरान शरीर में बहुत तरह के बदलाव आते हैं। खाने-पीने की ओर खास ध्यान देना पड़ता है ताकि मां और बच्चा, दोनों लोग स्वस्थ रहें। विटामिन्स, आयरन और कैल्शियम मां को भरपूर मात्रा में मिलना बहुत जरूरी है। क्यूंकि इन पोषक तत्वों से ही बच्चे का शारीरिक विकास अच्छी तरह से होता है।

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हड्डियों के लिए जरूरी है कैल्शियम

प्रेग्नेंसी के दौरान कैल्शियम से भरपूर, आहार और सप्लीमेंट लेने की बहुत जरुरत होती है। क्योंकि इससे ही बच्चे की हड्डियों का विकास होता है। बच्चे को जब पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम नहीं मिलता तो उसे मां की हड्डियों से कैल्शियम लेने की जरूरत पड़ने लगती है, जिससे डिलीवरी के बाद मां के शरीर में कमजोरी आना शुरू हो जाती है, जिससे बाद में गठिया और कमर दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी दिक्कतें सिर्फ गर्भावस्था में ही नहीं बल्कि बच्चे को दूध पिलाने वाली औरतों में भी देखने को मिलती हैं। इसके पीछे का कारण शरीर में कैल्शियम और पोषक तत्वों की कमी का होना है।

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दूध पिलाने वाली मां को कैल्शियम की ज्यादा जरूरत

प्रेग्नेंट और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं को न्यूटिशियंस और कैल्शियम से भरपूर आहार खाने आवश्कता होती है। क्योंकि प्रेग्नेंट और बच्चे को दूध पिलाने वाली मां के शरीर से ही बच्चा का पूर्ण पोषण होता है इसलिए इन महिलाओं को दूसरी औरतों के मुकाबले कैल्शियम की आवश्कता भी ज्यादा होती है। बच्चे की हड्डियों के विकास के लिए कैल्शियम बहुत जरूरी होता है। वहीं, अगर मां में ही कैल्शियम पर्याप्त नहीं होगा तो बच्चे को भी यह पूरी तरह से नहीं मिल सकेगा। इसके अलावा कैल्शियम की कमी उन महिलाओं को भी हो सकती हैं, जिनका खान-पान सही नहीं रहता है या जो हार्ड वर्क करती हैं।

कैल्शियम युक्त आहार का करें सेवन

18 से 40 साल तक की उम्र की महिलाएं हरी सब्जियों, अंडे, ड्राई फ्रूट्स, फलों और डेयरी प्रॉडक्टस से कैल्शियम की पूर्ति कर सकती हैं। महिलाओं को कैल्शियम के बाजारी सप्लीमेंट लेने की बजाए अपनी डाइट पर ध्यान देना चाहिए।

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अन्य पोषक तत्व भी जरूरी

कैल्शियम के अलावा मिनरल्स, प्रोटीन, आयरन, फाइबर और विटामिन भी प्रेग्नेंसी में बहुत जरूरी है। इसके साथ ही पेय पदार्थ और10-12 गिलास पानी का सेवन करने से सेहत संबंधी बहुत-सी दिक्कतें दूर रहती हैं। इससे शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकल जाते हैं। गर्भावस्था और मां को दूध पिलाने वाली मांओ को दिन भर थोड़े-थोड़े समय के बाद कुछ न कुछ जरूर खाते रहना चाहिए।

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हल्की-फुल्की एक्सरसाइज

सेहतमंद रहने के लिए व्यायाम भी बहुत जरूरी है। यह हड्डिय़ों को मजबूती देता है और इससे आपका तनाव भी कम रहता है। नॉर्मल डिलीवरी के 2-3 हफ्ते बाद और सी सैक्शन डिलीवरी के 4-6 हफ्तों बाद हल्की एक्सरसाइज करनी शुरू कर देनी चाहिए। सैर, योग, बॉडी स्ट्रैचिंग और हल्का-फुल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए। सिर्फ औरतों को ही नहीं, बल्कि हर वर्ग और उम्र को लोगों को रोजाना एक्सरसाइज करनी चाहिए।

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