आज है पापांकुशा एकादशी, जानिए महत्व और पूजन विधि

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आप सभी जानते ही हैं व्रतों में प्रमुख व्रत नवरात्रि, पूर्णिमा, अमावस्या और एकादशी के हैं. वहीं इन सभी में सबसे बड़ा व्रत एकादशी का माना जाता है और चन्द्रमा की स्थिति के कारण व्यक्ति की मानसिक और शारीरिक स्थिति खराब और अच्छी होती है. ऐसे में एकादशी व्रत से चन्द्रमा के हर खराब प्रभाव को रोका जा सकता है और ग्रहों के असर को भी कम कर सकते है, क्योंकि एकादशी व्रत का सीधा प्रभाव मन और शरीर, दोनों पर पड़ता है. ऐसे में आज पापांकुशा एकादशी है और हम बताने जा रहे हैं कि यह क्यों महत्वपूर्ण है और इस पापांकुशा एकादशी पर पूजा कैसे करें.

क्यों महत्वपूर्ण पापांकुशा एकादशी – कहते हैं पापांकुशा एकादशी स्वयं के साथ साथ दूसरों को भी लाभ पंहुचाती है . जी हाँ, इस एकादशी पर भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरुप की उपासना होती है और पापांकुशा एकादशी के व्रत से मन शुद्ध होता है. इसी के साथ इस दिन व्रत रखने से व्यक्ति के पापों का प्रायश्चित होता है. कहा जाता है इस दिन माता, पिता और मित्र की पीढ़ियों को भी मुक्ति मिलती है.

पापांकुशा एकादशी पर पूजा कैसे करें- इस दिन सुबह या शाम को श्री हरि के पद्मनाभ स्वरुप का पूजन करें और इसके बाद मस्तक पर सफेद चन्दन या गोपी चन्दन लगाकर पूजन करें. वहीं उनको पंचामृत, पुष्प और ऋतु फल अर्पित करें और उसके बाद एक वेला उपवास रखकर, एक वेला पूर्ण सात्विक आहार ग्रहण करें. ध्यान रहे शाम को आहार ग्रहण करने के पहले उपासना और आरती जरूर करें और आज के दिन ऋतुफल और अन्न का दान करना भी विशेष शुभ होता है.

पापांकुशा एकादशी पर किन बातों का ध्यान रखें – इस दिन अगर उपवास रखें तो बहुत उत्तम होगा और अगर नहीं रख रहे तो एक वेला सात्विक भोजन ग्रहण करें. इसी के साथ एकादशी के दिन चावल और भारी खाद्य का सेवन न करें और रात में पूजा उपासना करें. इसी के साथ आज के दिन क्रोध न करें, कम बोलें और आचरण पर नियंत्रण रखें.

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