आज है शरद पूर्णिमा, इसी दिन होती है कोजागरी लक्खी पूजा और कोजागरा पूजा, जानें महत्व

शरद पूर्णिमा
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नई दिल्ली। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शरद पूर्णिमा मनाया जाता है। शरद पूर्णिमा का दिन कई मायनों में महत्वपू्ण है। इस दिन जहां उत्तर भारत में इस दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और खीर का प्रसाद बनाकर रात को चंद्रमा के नीचे रखा जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था इसलिए इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। वहीं इस दिन बाल्मिकी जयंती भी है।इस दिन बंगाली समुदाय में कोजागरी लक्खी पूजा का भी विशेष आयोजन किया जाता है। पश्चिम बंगाल में कोजागरी लक्खी पूजा का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा मिथिलांचल में इस दिन कोजागरा पूजा की जाती है। ये पूजा नवविवाहितों के लिए एक अहम पूजा होती है।

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बंगाली समुदाय में कोजागरी लक्खी पूजा के दिन दुर्गापूजा वाले स्थान पर मां लक्ष्मी की विशेष रूप से प्रतिमा स्थापित की जाती है। नारयिल और गुड़ का लड्डू बना कर भोग लगाया जाता है। वहीं नवविवाहितों के जीवन में धन-धान्य और सुख समृद्धि बनी रही इसलिए कोजागरा पूजा की जाती है। इस दिन घर के बड़े नवविवाहितों को चावल देकर उन्हें आशिष देते हैं।

कुछ लोग गाय के दूध में भी केसर मिलाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस रात आसमान से चन्द्र देव अमृत बरसाते हैं। चंद्रमा द्वारा बरसाई जा रही चांदनी खीर या दूध को अमृत से भर देती है।

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