आज से ठीक 50 साल पहले जब इंसान ने रखा था चांद पर पहला कदम

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मुंबई। वो तारीख थी 20 जुलाई 1969। आज से ठीक 50 साल पहले जब इंसान ने चांद पर पहला कदम रखा था। पहली बार बच्चों की कहानियों में आने वाले ‘चंदा मामा दूर के’ नहीं रह गए थे। वैसे तो यह सफलता अमेरिका के खाते में गई थी पर इस ऐतिहासिक घटना ने इंसानों में नया रोमांच भर दिया था। चांद की सतह पर पहुंचने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को देखने और मिलने की खुशी इतनी थी कि मुंबई में एक भारतीय ने लॉटरी टिकटों में बंद अपनी किस्मत भी अपोलो 11 की टीम को सौंप दी थी।

भारत में अंतरिक्ष यात्रियों का वेलकम भी शाही अंदाज में किया गया था। दरअसल, चांद के सफर के बारे में दुनिया को बताने नील आर्मस्ट्रांग, एडविन एल्ड्रिन और माइकल कॉलिंस वर्ल्ड टूर पर निकले थे। 27 अक्टूबर 1969 को वे मुंबई में थे और उनका स्वागत किसी राजा-महाराजा की तरह किया गया।

तीनों अंतरिक्ष यात्रियों ने भी नहीं सोचा होगा कि धरती पर उनके स्वागत में अपने लॉटरी के टिकट भी सौंप देंगे। इस सफर पर पत्नियां भी उनके साथ थीं। यहां से वे बांग्लादेश गए थे। टाइम्स ऑफ इंडिया की 28 अक्टूबर 1969 की रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन बॉम्बे के रहने वाले नवीनचंद्र कजारिया ने अंतरिक्ष यात्रियों को अपने टिकट सौंप दिए थे। उन्होंने उम्मीद जताई थी, ‘जो अंतरिक्ष यात्री चांद पर फतह कर सुरक्षित लौटें हैं उनकी किस्मत महाराष्ट्र स्टेट लॉटरी का उनका 3 लाख रुपये का दिवाली जैकपॉट जीतने में भी साथ देगी।’ हालांकि इस बात का पता नहीं चलता है कि वे लॉटरी जीते या नहीं पर इस घटना से एक बात तो पता चलती है कि वर्ल्ड टूर के 19वें स्टॉप बॉम्बे पहुंचने पर अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर लोगों में उत्साह कितना था।

रविवार के दिन 26 अक्टूबर को वे खुली कार में एयरपोर्ट से निकले। चांद से मिलने वाले इंसान से मिलने को उत्साहित भीड़ सड़क के किनारे उनका हाथ हिलाकर स्वागत कर रही थी। TOI की रिपोर्ट के मुताबिक आजाद मैदान पर तब तक उतनी भीड़ कभी नहीं हुई थी और सभी अनुशासित तरीके से अंतरिक्ष यात्रियों को देख रहे थे। उनके पहुंचने से पहले लोग दोपहर में वहां बैठे और जाते समय नारे भी लगाए गए।

वहां जो स्टेज बना था, वह ईगल लुनार मॉड्यूल की बिल्कुल कॉपी था। ईगल का एक हिस्सा चांद पर ही रह गया था और दूसरे के इस्तेमाल अंतरिक्ष यात्रियों ने चांद से आते समय किया था। बाद में वह भी चांद की सतह पर रह गया। ऐसे में अंतरिक्ष यात्रियों के लिए बॉम्बे में ईगल की हूबहू कॉपी देख आश्चर्य भी हुआ था। आर्मस्ट्रांग ने कहा, ‘हमारे दोस्त, ईगल को एक बार फिर देखकर काफी खुशी हुई।’

जह वे सोमवार सुबह में जा रहे थे तब भी भीड़ जुटी रही। TOI की रिपोर्ट में बताया गया था कि जिस रास्ते से अंतरिक्ष यात्रियों का काफिला गुजरने वाला था, वहां मौजूद कई फैक्ट्रियों के कर्मचारियों और स्कूलों के बच्चों को बाहर निकलकर उन्हें देखने की अनुमति दी गई थी। इस बार अंतरिक्ष यात्री बंद कार में बैठे थे, तो लोगों ने उन पर फूल बरसाए थे।

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