यूपी बोर्ड ने अग्रसारण केंद्रों को किया तलब, भेजा नोटिस

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लखनऊ। यूपी बोर्ड के  वर्ष 2018 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए भरवाए गए व्यक्तिगत परीक्षा फार्मों में भारी गड़बडिय़ां पकड़ी गई हैं। अग्रसारण केंद्रों की ओर से भेजे गए इंटर के फार्मों में हाईस्कूल की मार्कशीटें व अन्य दस्तावेज गड़बड़ होने की बात सामने आ रही है।

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मूल अभिलेखों के साथ हों उपस्थित प्रधानाचार्य

  • माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस मामले में बोर्ड ने संबंधित अग्रसारण केंद्रों को नोटिस जारी की है।
  • प्रधानाचार्यों को मूल अभिलेखों के साथ को कार्यालय में तलब किया है।
  • इनमें राजधानी के आधा दर्जन स्कूल शामिल हैं।
  • दरअसल, यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल एवं इंटर के संस्थागत छात्र-छात्राओं के परीक्षा फार्म भरने की व्यवस्था ऑनलाइन की थी।
  • वहीं व्यक्तिगत परीक्षा फार्म भरने के लिए राजधानी में 24 अग्रसारण केंद्र भी बनाए थे।

500 हाईस्कूल के छात्र एवं 300 इंटर के छात्र अधिकतम सीमा

  • प्रत्येक अग्रसारण केंद्र पर 500 हाईस्कूल के छात्र एवं 300 इंटर के छात्र अधिकतम सीमा है।
  •  इस सीमा तक ही आवेदन पत्र अग्रसारित करने की सीमा निर्धारित की गई थी।
  • लेकिन इन केंद्रों की ओर से बोर्ड को भेजे गए परीक्षा फार्मों एवं अन्य दस्तावेजों की जांच में भारी गड़बड़ी मिली है।
  • विभागीय सूत्रों की मानें तो ज्यादातर गड़बड़ी इंटर के परीक्षा फार्मों में मिली है।
  • जिसमें हाईस्कूल की मार्कशीट फर्जी होने की बात सामने आ रही है।
  • बोर्ड की जांच पड़ताल में राजधानी के आधा दर्जन स्कूलों की गड़बड़ी सामने आई है।
  • इसके सहित प्रदेश भर के दर्जनों अग्रसारण केंद्र इसमें फंसे हैं।

बढ़ सकती है फर्जी अभ्यर्थियों की संख्या

  • जांच की प्रक्रिया चल रही है इसलिए यह संख्या अभी और भी बढ़ सकती है।
  • सीएम के निर्देश पर विभाग गंभीरता से जांच में जुटा है।
  • पिछले साल मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी मिली थी।
  • 25 से 30 हजार छात्र-छात्राओं को फर्जी दस्तावेज के सहारे बोर्ड परीक्षा में शामिल करा दिया था।

जांच में फर्जीवाड़े का खुलासा

  • मामले की जानकारी पर बोर्ड ने जांच करवाई तो फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।
  • इसे गंभीरता से लेते हुए अभ्यर्थियों के अंकपत्र सह प्रमाणपत्र निरस्त कर दिए गए।
  • निरस्तीकरण का आदेश वापस लेने के लिए बोर्ड पर काफी दबाव पड़ा।
  • उस मामले से सबक लेते हुए सरकार और बोर्ड इस बार किसी प्रकार का जोखिम नहीं उठाना चाहता है।

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