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चार साल बाद यूपी पुलिस को मिलेगा परमानेंट DGP… जानें कौन रेस में सबसे आगे?

DGP

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उत्तर प्रदेश पुलिस को करीब चार साल के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार एक स्थायी पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने जा रहा है। इसकी चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आज मंगलवार को दिल्ली में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। इस उच्चस्तरीय बैठक में उत्तर प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व करने के लिए मुख्य सचिव (चीफ सेक्रेटरी) एसपी गोयल दिल्ली पहुंचे हैं। इस बैठक के दौरान यूपीएससी यूपी कैडर के तीन सबसे वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारियों के नामों का एक शॉर्टलिस्टेड पैनल तैयार करेगा, जिसे अंतिम निर्णय के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। इन तीन अधिकारियों में से ही किसी एक को यूपी पुलिस का स्थायी मुखिया चुना जाएगा, जिसमें वर्तमान कार्यवाहक डीजीपी राजीव कृष्ण का नाम सबसे आगे चल रहा है।

पैनल की रेस में शामिल प्रमुख दावेदार:

स्थायी डीजीपी (DGP) पद की दौड़ में तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नाम सबसे ऊपर चल रहे हैं, जिनकी प्रोफाइल इस प्रकार है:

क्यों आवश्यक है स्थायी डीजीपी (DGP) की नियुक्ति:

उत्तर प्रदेश में मई 2022 में तत्कालीन डीजीपी (DGP) मणीलाल गोयल के हटने के बाद से कोई भी परमानेंट पुलिस प्रमुख नहीं बन सका था और तब से राज्य की कानून-व्यवस्था कार्यवाहक डीजीपी के भरोसे ही चल रही थी। प्रशासनिक स्थिरता और पुलिस बल के मनोबल को बनाए रखने के लिए एक स्थायी मुखिया का होना बेहद जरूरी माना जाता है। अब चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट और यूपीएससी के नियमों के तहत स्थायी प्रमुख मिलने से यूपी पुलिस की प्रशासनिक नीतियों को एक नई स्थिरता और दीर्घकालिक दिशा मिलने की उम्मीद है।

दिल्ली में आज होने वाली बैठक के बाद जैसे ही यूपीएससी तीन नामों का पैनल लखनऊ भेजेगा, राज्य सरकार उनमें से एक नाम फाइनल कर उसकी आधिकारिक घोषणा कर देगी।

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