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भीषण गर्मी में यूपी ने बनाया बिजली सप्लाई का रिकॉर्ड

Power Supply

Power Supply

उत्तर प्रदेश में इस समय पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से बिजली की मांग आसमान छू रही है। पिछले कुछ दिनों के आंकड़ों को देखें तो 16 जून को राज्य में 30,760 मेगावाट बिजली की रिकॉर्ड सप्लाई (Power Supply) की गई, जो अब तक का एक बड़ा आंकड़ा है। इससे ठीक पहले, 15 जून को 29,579 मेगावाट और 14 जून को 29,571 मेगावाट बिजली की आपूर्ति की गई थी। यूपीपीसीएल (UPPCL) के निदेशक वितरण ज्ञानेंद्र धर द्विवेदी ने बताया कि राज्य में जितनी मांग आ रही है, उसी के हिसाब से लगातार बिजली दी जा रही है। देश में सबसे ज्यादा बिजली की मांग को पूरा करने वाले राज्यों में उत्तर प्रदेश लगातार आगे बना हुआ है।

प्रशासन का कहना है कि राज्य के ज्यादातर इलाकों में लोगों को पर्याप्त बिजली मिल रही है, जिससे घरों के काम, व्यापार और खेती-किसानी से जुड़ी गतिविधियां अच्छे से चल पा रही हैं। बिजली विभाग के कर्मचारी इस कड़कड़ाती गर्मी, तेज आंधी और अचानक होने वाली बारिश जैसी दिक्कतों के बीच भी दिन-रात काम में जुटे हुए हैं। लाइनों में आने वाली खराबी (फॉल्ट) और ट्रिपिंग की समस्याओं को दूर करने के लिए विभाग ने एक खास अभियान भी शुरू किया है, जिसके तहत बिजली लाइनों और सब-स्टेशनों के आसपास लगातार साफ-सफाई की जा रही है।

एक सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले साल 2026-27 तक उत्तर प्रदेश 33,033 मेगावाट की सबसे ज्यादा मांग के साथ देश का दूसरा सबसे बड़ा बिजली खपत वाला राज्य बन जाएगा। फिलहाल इस मामले में महाराष्ट्र सबसे आगे है, जिसकी अनुमानित मांग 36,858 मेगावाट के करीब है। उत्तर प्रदेश में इसी साल 24 मई को बिजली की मांग 31,824 मेगावाट तक पहुंच गई थी, जो कुछ जगहों पर आए ब्रेकडाउन के कारण बढ़कर 33,000 मेगावाट को भी पार कर गई थी।

इस बीच, राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने सरकार से मांग की है कि उपभोक्ताओं के लोड के हिसाब से बिजली के उपकरणों और ट्रांसफार्मरों की व्यवस्था दुरुस्त की जाए। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि राज्य का कुल लोड 8 करोड़ 57 लाख किलोवाट से ज्यादा है, जबकि हमारे सब-स्टेशनों की क्षमता 6 करोड़ 25 लाख 76 हजार किलोवाट ही है।

इस वजह से मांग और क्षमता के बीच 2 करोड़ किलोवाट से ज्यादा का एक बड़ा अंतर आ जाता है, जिससे पूरी बिजली व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ता है। उन्होंने इस संकट से निपटने के लिए पुराने संविदा कर्मचारियों को काम पर वापस बुलाने और बिजली के ट्रांसमिशन व वितरण नेटवर्क को नया और आधुनिक बनाने के लिए एक विशेष योजना तैयार करने की मांग उठाई है।

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