संसद के मॉनसून सत्र में FCRA (संशोधन) बिल, 2026 को लेकर बुधवार को लोकसभा में जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने विधेयक को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए, जबकि सरकार ने आरोपों को खारिज करते हुए इसे संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। ध्वनिमत से प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद बिल अब JPC की समीक्षा में जाएगा।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में बिल को JPC के पास भेजने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर अल्पसंख्यकों और NGOs को निशाना बनाने का आरोप लगाया और विधेयक वापस लेने की मांग की।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस के आरोपों पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस समेत विपक्षी दल पहले खुद बिल को JPC में भेजने की मांग कर रहे थे। ऐसे में अब समिति के सामने अपनी आपत्तियां रखी जा सकती हैं।
अखिलेश यादव के आरोपों पर रिजिजू का पलटवार
बहस के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पूरा विपक्ष बिल का विरोध कर रहा है और अल्पसंख्यकों को लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए।
रिजिजू ने जवाब देते हुए चुनौती दी कि अगर बिल का कोई प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ है तो उसे साबित किया जाए। उन्होंने कहा कि विधेयक JPC को भेजा जा रहा है और विपक्ष को समिति के सामने अपने सुझाव रखने चाहिए।
राज्यसभा में भी सरकार पर सवाल
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने गृह मंत्री अमित शाह की सदन में मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिस मंत्रालय से जुड़ा बिल है, उसके मंत्री को सदन में मौजूद रहना चाहिए।
वहीं, राज्यसभा में सदन के नेता जेपी नड्डा ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है।
अब FCRA संशोधन बिल पर आगे की प्रक्रिया JPC की समीक्षा और उसकी सिफारिशों पर निर्भर करेगी।
