‘बांग्लादेशी’ पत्नी को पाने के लिए तड़प रहा यूपी का सुरजन अधिकारी,इस वजह से नहीं मिल पा रहे दोनों

भटक रहा यूपी निवासी पतिभटक रहा यूपी निवासी पति

लखनऊ। बलरामपुर के तुलसीपुर के रहने वाले कारोबारी सुरजन अधिकारी एक लावारिस लड़की से शादी करने के बाद पत्नी प्रिया विश्वास को पाने के लिए इधर उधर रहे हैं। विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत प्रिया को बांग्लादेश का निवासी करार देते हुए निचली अदालत ने पहले दो वर्ष की सजा सुनाई थी।
दो हफ्ते पहले सजा के आखिरी पांच महीनों की सजा माफ कर रिहा करने के हाईकोर्ट ने के आदेश दिए, पर सुरजन की पत्नी से मिलने की इच्छा पूरी नहीं हुई। प्रिया को बांग्लादेश उच्चायोग को सौंपने का प्रयास प्रदेश सरकार कर रही है। इसके खिलाफ लखनऊ खंडपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुरजन ने हाईकोर्ट में दायर की है, जिस पर प्रदेश सरकार व अन्य संबंधित पक्षों को जवाब दाखिल करने के लिए अदालत ने कहा है। छह जुलाई को अगली सुनवाई रखी गई है।

दिलीप पाठक जोकि सुरजन अधिकारी के अधिवक्ता हैं उन्होंने दावा किया कि सुरजन की पत्नी प्रिया याची कोलकाता की रहनी वाली हैं। कोलकाता की रहने वाली दीप्ति पाठक नामक महिला को वह बचपन में लावारिस हालत में मिली थी। सुरजन से दीप्ति का परिचय था जिनके पास वे अक्सर कोलकाता जाते रहते थे। इसी बीच वे प्रिया के संपर्क में आए, दोनों में प्रेम हुआ और जुलाई 2016 में शादी कर ली।

जब सुरजन,प्रिया को तुलसीपुर आए

लेकिन जब वे प्रिया को लेकर तुलसीपुर आए, कुछ लोगों ने प्रिया को बांग्लादेशी बताते हुए पुलिस में शिकायत कर दी। प्रिया को अनधिकृत रूप से भारत में बिना पासपोर्ट व वीजा के रहने पर निचली अदालत ने दो साल की सजा सुनाई। इसके खिलाफ अपील पर सजा के बचे हुए पांच महीने माफ करते 29 मई को हाईकोर्ट ने प्रिया को रिहा करने के आदेश दिए।

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सरकार का कहना, प्रिया भारतीय नागरिक से शादी करके दोषमुक्त नहीं हो जाती

हाईकोर्ट में प्रदेश सरकार की ओर से बताया गया कि प्रिया को विदेशी नागरिक अधिनियम में दोषी करार दिया जा चुका है। उसका दोष हाईकोर्ट के आदेश पर रिहा होने के बाद भी खत्म नहीं हो जाता। अनधिकृत रूप से भारत में रहते हुए उनकी भारतीय नागरिक से शादी उन्हें दोषमुक्त नहीं करती है।

इन हालातों में हाईकोर्ट के आदेश पर प्रिया को रिहा करने के बाद उन्हें बांग्लादेश हाईकमीशन को या उनके द्वारा अधिकृत किए गए किसी व्यक्ति को ही सौंपा जा सकता है। ऐसे में बलरामपुर जेल के वरिष्ठ अधीक्षक ने बांग्लादेश हाईकमीशन नई दिल्ली को पत्र लिखा है। इसी वजह से प्रिया को दिल्ली ले जाया गया है।

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